हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की रिपोर्ट के अनुसार, गोवा, तमिलनाडु और केरल इस बीमारी के प्रमुख हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं, जहां गोवा में डायबिटीज की व्यापकता दर 26.4% तक पहुंच गई है।
भारत में डायबिटीज का बढ़ता संकट
भारत में मधुमेह अब एक दुर्लभ बीमारी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। तीन दशक पहले जो स्थिति असामान्य थी, वह आज जीवनशैली में बदलाव, शहरीकरण और आहार संबंधी आदतों के कारण आम हो गई है। हालिया शोध से पता चलता है कि देश भर में मधुमेह का प्रसार एक समान नहीं है।
डायबिटीज के प्रमुख हॉटस्पॉट राज्य
ICMR-INDIAB परियोजना के तहत ‘द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, मधुमेह के मामलों में राज्यों के बीच काफी अंतर देखा गया है। कुछ राज्यों में यह बीमारी तेजी से पैर पसार रही है:
- गोवा: यह राज्य सूची में सबसे ऊपर है, जहां अनुमानित 26.4% आबादी मधुमेह से प्रभावित है। यानी गोवा में हर चार में से एक व्यक्ति डायबिटीज का मरीज हो सकता है।
- अन्य प्रभावित राज्य: गोवा के साथ-साथ तमिलनाडु और केरल में भी डायबिटीज की दर काफी अधिक पाई गई है।
मधुमेह के प्रसार के कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं:
- जीवनशैली में परिवर्तन: शारीरिक गतिविधि में कमी और बदलती दिनचर्या।
- शहरी विकास: तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण खान-पान और कार्यशैली में बदलाव।
- आनुवंशिक संवेदनशीलता: कई भारतीयों में मधुमेह के प्रति स्वाभाविक जेनेटिक संवेदनशीलता पाई जाती है।
