बिहार में महासेतु पर संकट: जादोपुर-मंगलपुर पुल में आई बड़ी तकनीकी खामी, भारी वाहनों की एंट्री बंद; अब 120 KM का अतिरिक्त चक्कर काटेंगे लोग

गोपालगंज/बेतिया: बिहार में बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गोपालगंज और पश्चिम चंपारण (बेतिया) को आपस में जोड़ने वाले सुप्रसिद्ध जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में गंभीर तकनीकी खराबी आने के बाद प्रशासन ने इसे भारी वाहनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है। पुल के स्पैन में खतरनाक गैप मिलने के बाद यह कदम एहतियातन उठाया गया है, जिससे इस रूट पर चलने वाले यात्रियों और ड्राइवरों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

स्पैन में मिला 7 से 9 इंच का गैप, दोनों तरफ की गई बैरिकेडिंग

जानकारी के मुताबिक, महासेतु के स्पैन के बीच अचानक 7 से 9 इंच तक की दूरी (गैप) देखी गई, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बढ़ गई थी। इसकी सूचना मिलते ही गोपालगंज जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीएम पवन कुमार सिन्हा ने तुरंत अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना किया। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद, पुल के दोनों छोर पर तुरंत मजबूत बैरिकेडिंग कर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

550 करोड़ का पुल, 10 साल में ही उठने लगे गुणवत्ता पर सवाल

दियारा क्षेत्र के सैकड़ों गांवों की लाइफलाइन माना जाने वाला यह महासेतु करीब 550 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुआ था। साल 2015-16 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका भव्य उद्घाटन किया था। इस पुल के बनने से गोपालगंज और चंपारण के बीच की दूरी बेहद कम हो गई थी, लेकिन महज एक दशक के भीतर ही पुल में ऐसी तकनीकी खराबी आने से इसके निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

डुमरिया घाट रूट से जाना होगा, 120 किलोमीटर लंबा हुआ सफर

पुल पर पाबंदी लगने का सबसे बड़ा असर यातायात पर पड़ा है। पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण और बगहा की ओर आने-जाने वाले सभी भारी वाहनों (ट्रकों और बसों) को अब डुमरिया घाट पुल के रास्ते डायवर्ट कर दिया गया है। इस रूट डायवर्जन की वजह से गाड़ियों को करीब 120 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे न सिर्फ यात्रियों का समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि माल ढुलाई की लागत भी बढ़ने की आशंका है।

विशेषज्ञों की टीम करेगी जांच

गोपालगंज के जिला प्रशासन के अनुसार, पुल की इस तकनीकी खामी को दुरुस्त करने के लिए जल्द ही पुल निर्माण निगम और तकनीकी विशेषज्ञों की एक स्पेशल टीम बुलाई जा रही है। विशेषज्ञों की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पुल की मरम्मत का काम शुरू होगा और यह तय किया जाएगा कि भारी वाहनों के लिए इसे दोबारा कब खोला जाए। तब तक छोटे वाहनों को बेहद सावधानी से निकलने की अनुमति दी जा रही है।

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