रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद आज स्थानीय लोगों और पीड़ित परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रशासन के ढुलमुल रवैये और मुआवजे की स्थिति साफ न होने से नाराज ग्रामीणों ने सात मृतकों के शवों को रामगढ़-बोकारो मुख्य मार्ग (NH-23) पर ‘मरांग मर्चा’ के पास रखकर सड़क पूरी तरह जाम कर दी।
इस चक्काजाम के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं, जिससे हजारों यात्री और गाड़ियां घंटों फंसे रहे।
परिजनों की प्रमुख मांगें:
गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखते हुए साफ कहा कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- पीड़ित परिवारों को उचित और तुरंत आर्थिक मुआवजा।
- प्रत्येक मृतक के परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी।
- अनाथ हुए बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च।
- प्रभावित परिवारों के लिए सरकारी आवास की व्यवस्था।
राजनीतिक दलों का मिला समर्थन, प्रशासन मौके पर
इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक दलों के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए, जिन्होंने परिजनों की मांगों को जायज ठहराते हुए उनके सुर में सुर मिलाया। जाम की वजह से राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
घटना की गंभीरता को देखते हुए रामगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस बल भारी संख्या में मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने के लिए बातचीत शुरू की और आश्वासन दिया कि नियमानुसार सभी मांगें पूरी की जाएंगी। फिलहाल सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और हाईवे से जाम खुलवाने के प्रयास जारी हैं।
