पलामू के सभी सीएचसी में शुरू होंगी बेबी केयर यूनिट, नवजातों को मिलेगी उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं

पलामू के सभी सीएचसी में शुरू होंगी बेबी केयर यूनिट, नवजातों को मिलेगी उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं

पलामू जिले में शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र—चैनपुर, लेस्लीगंज, पांकी, मनातू, पाटन, विश्रामपुर और हरिहरगंज—में जल्द ही बेबी केयर यूनिट स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में किसी भी सीएचसी में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण नवजात शिशुओं को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ता है।

स्वास्थ्य विभाग की योजना के पहले चरण में उन सभी सीएचसी में यूनिट शुरू किए जाएंगे, जहां अभी तक बेबी केयर की सुविधा नहीं है। इसका उद्देश्य प्रसव के तुरंत बाद नवजात को विशेषज्ञ देखभाल प्रदान करना है, ताकि जच्चा और बच्चा दोनों एक ही स्थान पर सुरक्षित रह सकें।

सीएचसी में हर महीने 200–300 प्रसव, लेकिन नवजात देखभाल की कमी

पलामू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रति माह 200 से 300 तक प्रसव होते हैं। इनमें कई शिशु ऐसे होते हैं जिन्हें जन्म के तुरंत बाद विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है। लेकिन बेबी केयर यूनिट न होने के कारण नवजातों को मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एसएनसीयू में भेजना पड़ता है।
इससे मां और बच्चे को अलग होना पड़ता है, जिसका असर स्तनपान पर पड़ता है। चिकित्सकों का कहना है कि डिब्बे के दूध पर निर्भरता बढ़ने से नवजात की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और बीमार पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।

हर महीने 8–10 नवजातों की मौत दर्ज

एसएनसीयू तक नवजातों को पहुंचाने में देरी और मां-बच्चे के अलगाव के कारण जिले में हर माह 8 से 10 नवजातों की मौत हो जाती है। खासकर समय से पहले जन्मे या कमजोर बच्चों के लिए शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
बेबी केयर यूनिट शुरू होने से इन मौतों को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग इन यूनिटों को प्रसूति वार्ड के पास स्थापित करेगा, ताकि नवजात और उसकी मां एक ही जगह पर रह सकें।

एचडीसी में यूनिट मौजूद, लेकिन स्टाफ की कमी से बंद

हुसैनाबाद और छतरपुर अनुमंडलीय अस्पतालों में बेबी केयर यूनिट पहले से बने हैं और संसाधन भी उपलब्ध हैं। लेकिन शिशु रोग विशेषज्ञ सहित आवश्यक फैकल्टी की कमी के कारण ये यूनिट संचालित नहीं हो पा रहे हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर सीएचसी स्तर पर बेबी केयर यूनिट खोले जाते हैं, तो शिशु रोग विशेषज्ञों की अनुपस्थिति में नवजातों का इलाज कैसे सुनिश्चित किया जाएगा?

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