रांची: शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कोविड वैक्सीन, इंडिगो संकट, दिल्ली ब्लास्ट, घुसपैठ और कमजोर आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों के आधार पर केंद्र की नीतियों की आलोचना की।
सोरेन ने कहा कि झारखंड केंद्र को भारी राजस्व देता है, लेकिन बदले में राज्य को धूल, मिट्टी, प्रदूषण, विस्थापन और पलायन जैसी समस्याएं मिलती हैं।
“देश में कटौती का नया दौर जारी” — हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजकल हर चीज में कटौती की जा रही है—कभी पैसों की, कभी वोटर लिस्ट में नाम की, कभी राशन की, कभी बिजली की और अब तो घर भी तोड़े जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश को जानबूझकर ऐसे मुद्दों में उलझाया जा रहा है ताकि असल समस्याओं पर कोई चर्चा ही न हो।
“दुनिया किस रिसर्च पर गर्व करे?”
उन्होंने कहा कि 2014 से अब तक देश कभी मंदिर–मस्जिद, कभी रेल–हवाई हादसों, कभी मौतों और बीमारियों के मुद्दों में उलझा रहा। हेमंत सोरेन ने कोविड वैक्सीन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई लोगों में इससे गंभीर बीमारियां बढ़ीं, हार्ट अटैक और कैंसर के मामले सामने आए। उनके अनुसार, यह सब अनुसंधान का विषय है और देश में रिसर्च के नाम पर सन्नाटा है।
उन्होंने सवाल उठाया—आखिर भारत ने ऐसी कौन-सी रिसर्च की है, जिस पर दुनिया गर्व कर सके?
देश की सुरक्षा पर केंद्र को घेरा
सोरेन ने घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि सीमा पर घुसपैठ हो रही है, तो यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है, राज्यों की नहीं। उन्होंने कहा कि लोग आसानी से सीमा पार करते हैं और पकड़े जाने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
दिल्ली के चांदनी चौक ब्लास्ट पर सवाल
मुख्यमंत्री ने चांदनी चौक में हुए बम विस्फोट को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, विस्फोट में इस्तेमाल हुआ केमिकल कई महीनों से जमा किया जा रहा था। उन्होंने पूछा कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध स्टोरेज होने के बावजूद किसी ने इसे रोका क्यों नहीं? क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा था?
“जंगल खाली कराकर अपने मित्रों को सौंपने की कोशिश”
हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों की तैनाती विशेष रूप से आदिवासी इलाकों में बढ़ाई जा रही है क्योंकि जंगलों को खाली कराकर कुछ विशेष लोगों को सौंपने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को लगातार उजाड़ा जा रहा है, जिससे आक्रोश बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री का कहना था कि देश में महंगाई पर कोई चर्चा नहीं होती, जबकि अन्य मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर सामने रखा जाता है।
