2025 में झारखंड का वन्यजीव इतिहास रचा गया: पहली बार बाघ का रेस्क्यू, हाथी-गौर की रिपोर्ट जारी, संरक्षित क्षेत्र से गांवों का विस्थापन

2025 में झारखंड का वन्यजीव इतिहास रचा गया: पहली बार बाघ का रेस्क्यू, हाथी-गौर की रिपोर्ट जारी, संरक्षित क्षेत्र से गांवों का विस्थापन

पलामू: जल-जंगल-जमीन और खनिज संपदा के लिए पहचाने जाने वाले झारखंड में वर्ष 2025 वन और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से ऐतिहासिक रहा। इस साल झारखंड के जंगल और वहां के वन्यजीव राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे। पहली बार राज्य के इतिहास में बाघ का सफल रेस्क्यू किया गया, वहीं हाथी और गौर को लेकर भी अहम रिपोर्ट जारी हुई। इसके साथ ही झारखंड में पहली बार किसी संरक्षित क्षेत्र से पूरे गांव का विस्थापन भी किया गया।

अंतरराष्ट्रीय शिकार नेटवर्क का खुलासा
झारखंड के जंगलों में सक्रिय शिकारियों के एक संगठित नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ, जिसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े पाए गए। राज्य में बाघों का एकमात्र संरक्षित क्षेत्र पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) है। वर्ष 2025 में इसी क्षेत्र से पूरे झारखंड में बाघों और अन्य मांसाहारी जीवों की गणना की शुरुआत हुई। इस दौरान हाथी और गिद्ध की संख्या का सर्वे भी किया गया।

पीटीआर में बढ़ी बाघों की मौजूदगी
25 जून को रांची के सिल्ली प्रखंड के मारदू गांव में पूरन चंद महतो के घर में एक बाघ घुस गया था। गनीमत रही कि इस घटना में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा। पलामू टाइगर रिजर्व और वन विभाग की संयुक्त टीम ने करीब 13 घंटे चले अभियान के बाद बाघ का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे फिर से पीटीआर के जंगल में छोड़ दिया।

रेस्क्यू किए गए इस बाघ को “सम्राट” और “किला” के नाम से जाना जाता है। इसे पहली बार पलामू किला क्षेत्र में देखा गया था, जिसके बाद यह लंबी दूरी तय करते हुए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया तक पहुंच गया। वापसी के दौरान यह सिल्ली इलाके में एक घर में घुस गया। वर्ष 2025 में पीटीआर क्षेत्र में बाघों की गतिविधियां लगातार रिकॉर्ड की गईं, जिससे यहां बाघों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। इसके अलावा चतरा और हजारीबाग जैसे इलाकों में भी बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई।

हाथी, बाघ और गौर पर रिपोर्ट जारी
अक्टूबर में हाथियों को लेकर जारी सर्वे रिपोर्ट में झारखंड में उनकी संख्या को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार पूरे राज्य में हाथियों की संख्या घटकर 217 रह गई है, जबकि 2017 में यह आंकड़ा 678 था। उस समय करीब 180 हाथी अकेले पलामू टाइगर रिजर्व में मौजूद थे। जारी आंकड़े मुख्य रूप से पीटीआर और दलमा क्षेत्र से जुड़े हैं। बाघों की गणना के साथ-साथ हाथियों की भी दोबारा गिनती की जा रही है, ताकि उनकी वास्तविक संख्या का सही आकलन हो सके।

इसी तरह 2025 में गौर (इंडियन बाइसन) की मौजूदगी पर भी रिपोर्ट सामने आई, जिसमें पीटीआर क्षेत्र में करीब 60 गौर होने की पुष्टि की गई। हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि यहां के गौर आनुवंशिक रूप से कमजोर हैं।

संरक्षित क्षेत्र से पहली बार गांवों का विस्थापन
2025 में झारखंड के इतिहास में पहली बार किसी संरक्षित क्षेत्र से पूरे गांव की आबादी को विस्थापित किया गया। पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में स्थित जयगीर और कुजरूम गांव के करीब 80 परिवारों को हटाकर पलामू के पोलपोल इलाके में बसाया गया है, जहां एक मॉडल गांव विकसित किया गया है। पीटीआर प्रशासन की योजना है कि रिजर्व क्षेत्र से विस्थापित होने वाली आबादी को इसी तरह मॉडल गांवों में बसाया जाए।

विस्थापित परिवारों को मुआवजा देने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि उनका पुनर्वास सुचारू रूप से हो सके और वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिल सके।

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