रांची: वन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों के लिए डीप बोरिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हाल ही में पर्यावरण विभाग और जैव विविधता पर्षद ने इस संबंध में राज्य सरकार को अनुशंसा की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। नए निर्देशों के तहत केंद्र और राज्य सरकार की सड़क परियोजनाओं, बिजली और संचार सुविधाओं के लिए टावर लगाने, तथा खनन क्षेत्रों में अयस्कों की सफाई जैसे कार्यों के लिए 300 फीट से अधिक गहराई की डीप बोरिंग पर रोक रहेगी।
इसके अलावा, वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि के लिए यदि नदी या डैम से जल लिया जाना है, तो इसकी जानकारी संबंधित वन क्षेत्र प्रशासन को देना अनिवार्य होगा। किसी भी नई योजना के लिए पर्यावरण और वन स्वीकृति लेने से पहले परियोजना में उपयोग होने वाले जल की मात्रा का आकलन संबंधित एजेंसी को प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद स्थानीय जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ही अनुमति दी जाएगी।
गौरतलब है कि वन भूमि पर सड़क निर्माण या पक्की संरचनाओं के निर्माण पर पहले से ही रोक है, लेकिन आसपास के क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्यों के लिए अक्सर वन भूमि में डीप बोरिंग कराई जाती रही है। नए नियमों से इस पर भी प्रभावी नियंत्रण लगेगा।
भूगर्भ जल संरक्षण पर जोर
राज्य में इस वर्ष औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिससे भूगर्भ जल स्तर में बढ़ोतरी हुई है। जंगलों में बहने वाले छोटे नाले और प्राकृतिक चेकडैम के माध्यम से जल रिचार्ज भी पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर हुआ है। वन एवं पर्यावरण विभाग इस सकारात्मक स्थिति को बनाए रखने और जल संरक्षण को मजबूती देने के लिए नए नियम लागू कर रहा है।
