नई दिल्ली: संसद की एक स्थायी समिति ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत दी जाने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन की राशि की समीक्षा करने और इसे बढ़ाकर सम्मानजनक स्तर तक ले जाने की सिफारिश की है। समिति ने कहा कि वर्तमान में मिलने वाली 1,000 रुपये मासिक पेंशन बढ़ती महंगाई के दौर में पर्याप्त नहीं है।
7500 रुपये पेंशन की मांग तेज
पेंशनधारक लंबे समय से न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपये प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर EPS-95 पेंशनधारकों ने 9 मार्च से जंतर-मंतर पर तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन भी किया था। उनका कहना है कि 1,000 रुपये में आज के समय में गुजारा करना बेहद मुश्किल है।
समिति ने रिपोर्ट में जताई चिंता
श्रम, वस्त्र और कौशल विकास से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026-27) पर अपनी 15वीं रिपोर्ट में कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन कई वर्षों से 1,000 रुपये पर ही स्थिर है।
समिति ने कहा कि उसे बड़ी संख्या में ऐसे प्रतिवेदन मिले हैं, जिनमें खासकर वृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर पेंशनधारकों की वित्तीय कठिनाइयों को देखते हुए पेंशन बढ़ाने की मांग की गई है।
महंगाई के हिसाब से पेंशन बढ़ाने की जरूरत
समिति ने कहा कि बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य खर्च और जीवनयापन की लागत को देखते हुए वर्तमान पेंशन राशि पेंशनधारकों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी अपर्याप्त है।
इसलिए समिति ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से सिफारिश की है कि:
- कर्मचारी पेंशन योजना (1995) के तहत न्यूनतम पेंशन की तत्काल समीक्षा की जाए।
- पेंशन राशि को समय के अनुरूप सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाए।
बजटीय सहायता बढ़ाने का सुझाव
समिति ने यह भी कहा कि सरकार को इस योजना के लिए बजटीय सहायता बढ़ाने की संभावना तलाशनी चाहिए, ताकि पेंशनधारकों को मौजूदा जीवनयापन लागत के अनुसार उचित पेंशन मिल सके।
वर्तमान में इस योजना के तहत:
- सरकार 1.16% का योगदान देती है।
- न्यूनतम 1,000 रुपये मासिक पेंशन सुनिश्चित करने के लिए बजटीय सहायता भी प्रदान की जाती है।
श्रम संहिता के बेहतर क्रियान्वयन की सिफारिश
समिति ने श्रम संहिता के कार्यान्वयन का स्वागत करते हुए केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ एक स्थायी समन्वय एवं संवाद बोर्ड बनाने की भी सिफारिश की है।
अनुबंध श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई कॉन्ट्रैक्ट श्रमिक नियमित कर्मचारियों के समान काम करते हैं, लेकिन कार्यस्थल दुर्घटनाओं के बाद उन्हें राहत और मुआवजा मिलने में देरी होती है।
इसलिए समिति ने सुझाव दिया कि ऐसे श्रमिकों को समय पर:
- कर्मचारी राज्य बीमा (ESI)
- कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)
जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जाए।
साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे अनुपालन की निगरानी और मुआवजे के समय पर भुगतान के लिए प्रभावी व्यवस्था स्थापित करें।
