मालवीय नगर हादसे के बाद दिल्ली में अग्नि सुरक्षा पर गंभीर सवाल, 6 वर्षों में आग ने ली 543 जानें

दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर देश की राजधानी में फायर सेफ्टी (अग्नि सुरक्षा) के इंतजामों की पोल खोल दी है। इस हादसे के बाद सुरक्षा उपायों को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच चौंकाने वाले आधिकारिक आंकड़े सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में दिल्ली में आग लगने की विभिन्न घटनाओं में 543 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

मालवीय नगर होटल हादसे में 21 की मौत, ज्यादातर विदेशी नागरिक

हालिया संकट बुधवार को तब गहराया जब मालवीय नगर की एक तंग गली में स्थित ‘फ्लोरिश स्टे’ बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) होटल में भयंकर आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश विदेशी पर्यटक थे। इसके अलावा 25 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। गौरतलब है कि इससे ठीक पहले विवेक विहार और पालम इलाकों में हुए अग्निकांडों में भी 9-9 लोगों की मौत हो चुकी है।

साल 2026 के शुरुआती महीनों में ही 65 मौतें

दिल्ली सरकार के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि साल 2019 से लेकर मार्च 2026 तक आग से जुड़ी दुर्घटनाओं में कुल 543 लोगों की मौत हुई है। चिंताजनक बात यह है कि चालू वर्ष 2026 के शुरुआती लगभग छह महीनों के भीतर ही आग के चलते 65 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

साल-दर-साल मौतों का ग्राफ (2019-2026)

दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मौतों का सिलसिला लगातार जारी रहा है:

वित्तीय वर्षआग से हुई मौतें
2019-20सबसे अधिक मौतें (अनाज मंडी अग्निकांड – 44 मौतें शामिल)
2020-2141 मौतें
2021-2255 मौतें
2022-2395 मौतें
2023-2477 मौतें
2024-2590 मौतें
2025-2684 मौतें

नोट: साल 2019-20 में हुआ अनाज मंडी अग्निकांड, 1997 के उपहार सिनेमा हादसे (59 मौतें) के बाद दिल्ली की सबसे वीभत्स त्रासदियों में से एक था।

घायलों की संख्या 4 हजार के पार, फायर कॉल में भी भारी इजाफा

सरकारी रिपोर्ट बताती है कि 2019 से 2025 के बीच सिर्फ मौतें ही नहीं हुईं, बल्कि आग से जुड़ी दुर्घटनाओं में 4,403 लोग गंभीर रूप से झुलसे और घायल हुए हैं। इसके साथ ही दिल्ली अग्निशमन सेवा को मिलने वाले इमरजेंसी कॉल्स (सूचनाओं) की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई है। साल 2019-20 में जहां विभाग को 17,231 फायर कॉल्स मिली थीं, वहीं पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा बढ़कर 20,379 तक पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि राजधानी में आग लगने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

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