निष्पक्ष सुनवाई आरोपी का अधिकार, चार्जशीट का हिस्सा बने दस्तावेज देने से नहीं रोक सकते: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भी आरोपी को उस आरोपपत्र (चार्जशीट) का हिस्सा रहे दस्तावेजों को देखने या प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा करना संविधान के तहत आरोपी को मिले ‘निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार’ का गंभीर उल्लंघन है। न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए एस चंदूरकर की पीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला पूर्व रॉ (RAW) अधिकारी और सेवानिवृत्त मेजर जनरल वी के सिंह से जुड़े एक मामले में दिया।

पूर्व रॉ अधिकारी वीके सिंह मामले में आया अहम फैसला

यह पूरा मामला साल 2007 का है, जब सेवानिवृत्त मेजर जनरल वी के सिंह के खिलाफ ‘शासकीय गोपनीयता अधिनियम, 1923’ (Official Secrets Act) के तहत मामला दर्ज किया गया था। सीबीआई (CBI) ने इन दस्तावेजों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ‘‘अत्यंत गोपनीय’’ बताते हुए आरोपी को देने से इनकार कर दिया था। सीबीआई का तर्क था कि कॉपियां देने से ये दस्तावेज सार्वजनिक हो सकते हैं।

कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: ‘गोपनीयता’ के नाम पर अधिकार नहीं छीन सकते

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की दलीलों को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा:

“यह स्थापित कानून है कि आरोपी को चार्जशीट का हिस्सा बने दस्तावेजों से दूर नहीं रखा जा सकता, चाहे उसमें सामान्य डायरी के दस्तावेज ही क्यों न शामिल हों। अगर कोई दस्तावेज अभियोजन के मामले से संबंधित है, तो न्याय और निष्पक्ष सुनवाई के हित में उसका प्रकटीकरण अनिवार्य है। ऐसे दस्तावेजों को छिपाकर रखने से आरोपी के पक्ष को गंभीर क्षति पहुंचती है।”

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार) का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में हुआ संशोधन

मेजर जनरल वी के सिंह ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 207 के तहत निचली अदालत में याचिका दायर कर उन दस्तावेजों की मांग की थी जो चार्जशीट का हिस्सा तो थे, लेकिन उन्हें सौंपे नहीं गए थे। दिसंबर 2009 में निचली अदालत ने उनके पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन पिछले साल सितंबर में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस आदेश में संशोधन कर दिया था। इसके बाद सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

कोर्ट ने निकाला बीच का रास्ता: शर्तें लागू

राष्ट्रीय सुरक्षा और आरोपी के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के विधि अधिकारी के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए निर्देश जारी किए:

  • टाइप की हुई प्रतियां: पूर्व मेजर जनरल वी के सिंह को उन ‘अत्यंत गोपनीय’ दस्तावेजों की केवल टाइप की हुई कॉपियां (प्रतियां) उपलब्ध कराई जाएंगी।
  • सख्त हिदायत: आरोपी इन दस्तावेजों का उपयोग केवल और केवल अदालती कार्यवाही के लिए ही कर सकेंगे।
  • मीडिया पर बैन: इन गुप्त दस्तावेजों को किसी भी रूप में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट मीडिया या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित (Share) नहीं किया जा सकेगा।
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