बिहार में नया विश्वविद्यालय अधिनियम लाने की तैयारी: 15 राज्यों के कानूनों के अध्ययन से तैयार होगा ड्राफ्ट, राजभवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक

पटना: बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सरल और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार एक नया विश्वविद्यालय अधिनियम (यूनिवर्सिटी एक्ट) लागू करने की तैयारी में है। यह नया कानून देश के करीब 15 राज्यों के विश्वविद्यालय कानूनों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं व नियमों के गहन अध्ययन पर आधारित होगा। इस सिलसिले में शुक्रवार को राजभवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

कुलाधिपति की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक

यह महत्वपूर्ण बैठक राज्यपाल सह राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में संपन्न हुई। उच्च शिक्षा के नियामकीय ढांचे (Regulatory Framework) को सुधारने के उद्देश्य से बुलाई गई इस बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह समेत शिक्षा विभाग और राजभवन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और आधुनिक बनाने का लक्ष्य

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि राज्य के विश्वविद्यालयों के संचालन और शैक्षणिक सत्रों को नियमित करने के लिए मौजूदा कानूनों में बदलाव जरूरी है। नया अधिनियम आने से विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक और अकादमिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी, जिससे छात्रों को समय पर डिग्री और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।

सरकार का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के मौजूदा ढांचे को सरल बनाना है ताकि अन्य विकसित राज्यों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तरह बिहार के छात्र-छात्राओं को भी वैश्विक स्तर की सुविधाएं और शिक्षा मिल सके। इसके लिए विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों को इस नए ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा।

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