गढ़वा: देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में शनिवार को गढ़वा परिसदन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान कांग्रेस प्रवक्ताओं और नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
पेपर लीक के आंकड़ों से घेरा: 10 साल में 89 मामले
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश प्रवक्ता ऋषीकेश सिंह ने कहा कि साल 2014 से 2024 के बीच देशभर में करीब 89 पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं, जिसकी वजह से 48 परीक्षाएं दोबारा करानी पड़ीं। उन्होंने एक अन्य अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि पिछले 5 वर्षों में ही 15 राज्यों में 41 पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जिससे 1.4 करोड़ अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया।
कांग्रेस नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ तो बना दिया, जिसमें 3 से 10 साल की सजा और 1 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है; लेकिन इसके बावजूद जमीन पर पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुक रही हैं।
NEET सहित 4 बड़ी परीक्षाओं से 1 करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित
प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता मृदुल राज ने हाल के वर्षों में हुए बड़े पेपर लीक का ब्योरा दिया:
- NEET UG 2026: इस परीक्षा में हुई धांधली से करीब 24 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट से लेकर सीबीआई जांच तक पहुंच गया।
- यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2024: सोशल मीडिया पर पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द हुई, जिससे 48 लाख छात्र प्रभावित हुए।
- CTET 2021: पेपर लीक की वजह से 28 लाख से अधिक उम्मीदवारों को नुकसान झेलना पड़ा।
- UGC NET 2024: परीक्षा के ठीक अगले ही दिन इसे रद्द करना पड़ा, जिससे 11 लाख छात्र प्रभावित हुए।
सरकारी विभागों में लाखों पद खाली, उच्च शिक्षित युवा बेरोजगार
गढ़वा जिलाध्यक्ष ओबैदुल्लाह हक अंसारी, सुरेंद्रनाथ तिवारी और सुधीर कुमार चंद्रवंशी ने केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1 मार्च 2023 तक केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 9,64,359 पद खाली पड़े थे। वहीं, जुलाई 2024 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में भी 84,106 पद रिक्त थे।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आज देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि उच्च शिक्षित (स्नातक और स्नातकोत्तर) युवा बेरोजगारी की सबसे तगड़ी मार झेल रहे हैं। युवाओं में बढ़ती हताशा और आत्महत्या के मामलों पर चिंता जताते हुए कांग्रेस ने केंद्र सरकार से शिक्षा बजट बढ़ाने और पूरी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग की है।
