पटना/रोहतास: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना-2026’ के क्रियान्वयन को लेकर पर्यटन विभाग विवादों के घेरे में आ गया है। शाहाबाद महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष अखिलेश कुमार ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए योजनाओं के चयन में भारी लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की है, लेकिन अधिकारियों की अदूरदर्शिता के कारण इस योजना का मूल उद्देश्य ही खटाई में पड़ता दिख रहा है।
“जमीनी हकीकत से दूर, सिर्फ कागजों पर चल रहा काम”
अध्यक्ष अखिलेश कुमार ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य सरकार पर्यटन विकास को लेकर पूरी तरह गंभीर है, लेकिन सचिवालय और जिला स्तर पर बैठे अधिकारी जमीनी अध्ययन करने के बजाय सिर्फ बंद कमरों में बैठकर कागजी प्रक्रिया के आधार पर फैसले ले रहे हैं। यही वजह है कि धरातल पर योजनाएं बेअसर साबित हो रही हैं।
चयनित स्थलों पर खड़े किए बड़े सवाल
समिति ने रोहतास जिले में योजना के लिए चुने गए स्थलों की उपयोगिता पर आपत्ति जताई है:
- मांझरकुंड और धुआंकुंड: अधिकारियों ने इन दोनों को अलग-अलग चुना है, जबकि ये दोनों वस्तुतः एक ही जलप्रपात के दो हिस्से हैं और इनके बीच की दूरी बेहद कम है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन स्थलों के पास योजना की पात्रता के अनुसार कोई आबादी या गांव ही नहीं है, जिससे स्थानीय लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।
- शेरशाह सूरी का मकबरा: यह स्थल सासाराम जिला मुख्यालय के बीचों-बीच स्थित है, जहां पहले से ही पर्यटकों के लिए होटलों और लॉज की पर्याप्त व्यवस्था है। ऐसे में यहां होमस्टे योजना शुरू करने का कोई ठोस तार्किक आधार नहीं दिखता।
इन प्रमुख पर्यटन स्थलों को शामिल करने की उठी मांग
शाहाबाद महोत्सव समिति ने मांग की है कि कागजी सर्वे को दरकिनार कर पर्यटन विभाग को तुरंत जमीनी सर्वे कराना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि रोहतास के वास्तविक विकास के लिए निम्नलिखित स्थलों को तुरंत इस योजना में शामिल किया जाए:
- रोहतासगढ़ किला
- तुतला भवानी
- कशिश वॉटरफॉल
- महादेव खोह
समिति का तर्क: इन ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों के आसपास ग्रामीण आबादी मौजूद है। अगर इन क्षेत्रों को ‘मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना’ से जोड़ा जाता है, तो इससे न केवल पर्यटकों को ठहरने का अनूठा ग्रामीण अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार और आर्थिक लाभ भी मिल सकेगा। समिति ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की है।
