रांची: झारखंड की राजधानी में प्रस्तावित रिम्स-2 (RIMS-2) परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांके-नगड़ी क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि पर बनने वाले इस अस्पताल के विरोध में स्थानीय रैयत और ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। अपनी आजीविका और जमीन की रक्षा के लिए सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पारंपरिक हथियारों से लैस होकर राजभवन के सामने सड़क पर उतर आए और सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे राज्य के विकास या स्वास्थ्य सुविधाओं के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उनकी आजीविका को नहीं छीना जा सकता।
“हमें विकास मंजूर है, लेकिन हमारी उपजाऊ जमीन की कीमत पर नहीं। सरकार विकास की वेदी पर हमारे परिवारों की आजीविका की बलि देना बंद करे।” — रैयत और आंदोलनकारी
विरोध के मुख्य कारण और ग्रामीणों के आरोप
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है:
- अधूरा भूमि अधिग्रहण: रैयतों का सीधा आरोप है कि जिस जमीन पर रिम्स-2 बनाने की प्रशासनिक तैयारी चल रही है, उसका कानूनी रूप से पूर्ण अधिग्रहण आज तक नहीं हुआ है।
- मुआवजे की कमी: प्रभावित होने वाले अधिकांश परिवारों को अब तक सरकार की ओर से कोई उचित मुआवजा नहीं मिला है।
- भुखमरी का खतरा: आंदोलनकारियों के मुताबिक, यह पूरी भूमि बेहद उपजाऊ है। क्षेत्र के सैकड़ों परिवार इसी जमीन पर खेती कर अपना जीवन-यापन करते हैं। यदि यह जमीन हाथ से निकल गई, तो उनके सामने सीधे तौर पर भुखमरी का संकट खड़ा हो जाएगा।
राजभवन के सामने हुए इस बड़े प्रदर्शन के बाद अब रिम्स-2 परियोजना एक प्रशासनिक प्रोजेक्ट से बदलकर बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।
