रांची: राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड में लगातार बढ़ रही ठंड और शीतलहर ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें सुबह-सुबह कंपकंपाती ठंड, घने कोहरे और सर्द हवाओं के बीच स्कूल जाने के लिए घर से निकलना पड़ रहा है। स्कूल बस पकड़ने के लिए सड़क तक पहुंचना बच्चों के लिए बेहद कठिन और जोखिम भरा हो गया है।
सुबह के समय तापमान में भारी गिरावट के साथ घना कोहरा छाया रहता है, जिससे सड़कों पर दृश्यता भी काफी कम हो जाती है। ठिठुरन भरी ठंड में छोटे-छोटे बच्चे बस्ते लटकाए स्कूल जाते दिखाई दे रहे हैं। कई सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पास पर्याप्त गर्म कपड़े भी नहीं हैं, जिससे सर्दी-जुकाम, बुखार और अन्य बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।
अभिभावकों का कहना है कि इतनी भीषण ठंड में बच्चों को घर से बाहर भेजना उनके लिए चिंता का कारण बन गया है। छोटे बच्चों की सेहत को लेकर वे आशंकित हैं, लेकिन स्कूलों में छुट्टी या समय में बदलाव नहीं होने के कारण मजबूरी में बच्चों को भेजना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से स्कूलों के समय में बदलाव या कुछ दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित करने की मांग की है।
इधर, ठंड से बचाव के लिए लोग अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन स्कूली बच्चों के लिए यह मौसम एक बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है। शहर के कई निजी स्कूलों ने स्थिति को देखते हुए अपने जूनियर सेक्शन, यानी पांचवीं कक्षा तक, छुट्टी की घोषणा कर दी है। डीएवी समूह के स्कूलों ने भी 25 दिसंबर से अवकाश देने का निर्णय लिया है।
जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
लगातार बढ़ती ठंड और शीतलहर को देखते हुए झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने रांची जिला प्रशासन से स्कूली बच्चों के हित में तत्काल कदम उठाने की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने उपायुक्त को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजकर जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों में कुछ दिनों के लिए पूर्ण अवकाश घोषित करने का आग्रह किया है।
अजय राय ने बताया कि मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार आने वाले कई दिनों तक ठंड से राहत की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि घना कोहरा और शीतलहर की स्थिति में सुबह स्कूल जाना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। सर्दी-खांसी, बुखार, निमोनिया, दमा और अन्य श्वसन रोगों का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। एसोसिएशन को लगातार अभिभावकों से शिकायतें मिल रही हैं कि बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, फिर भी उन्हें स्कूल भेजना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोपरि है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में केवल स्कूल समय में आंशिक बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। बच्चों के हित में प्रशासन को संवेदनशील और साहसिक निर्णय लेते हुए कुछ दिनों के लिए पूर्ण अवकाश की घोषणा करनी चाहिए।
शिक्षक संगठनों ने भी उठाई आवाज
घने कोहरे और शीतलहर के मद्देनजर झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने भी विद्यालयों में पठन-पाठन स्थगित करने या समयावधि घटाने की मांग की है। मोर्चा के सदस्यों ने बताया कि लगातार ठंडी हवाओं के कारण दिन में भी शीतलहर जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची ने पिछले 24 घंटों में दोपहर के समय भी शीतलहर को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है।
यह अलर्ट रांची, पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और लोहरदगा जिलों के लिए जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, पूरे राज्य में कड़ाके की ठंड को लेकर चेतावनी दी गई है और हालात ऐसे हैं कि रात जैसी ठंड अब दिन में भी महसूस हो रही है।
मोर्चा के प्रदेश संयोजक अमीन अहमद, विजय बहादुर सिंह और प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार दास ने शिक्षा सचिव उमा शंकर सिंह और निदेशक प्राथमिक शिक्षा को पहले ही मांग पत्र सौंपकर विद्यालय समयावधि को छात्रहित में कम करने की मांग की है। उनका कहना है कि ठंड के कारण छात्रों की उपस्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसे में या तो पठन-पाठन कुछ दिनों के लिए स्थगित किया जाए या फिर विद्यालयों का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक किया जाए, ताकि बच्चों को राहत मिल सके।
