पटना के बेऊर जेल से सोमवार शाम मोकामा विधायक अनंत सिंह की रिहाई के बाद हजारों समर्थक जुट गए। दुलारचंद यादव हत्याकांड में नाम आने के बावजूद चार महीने बाद जमानत पर बाहर आए अनंत सिंह का स्वागत नारेबाजी, फूलों की बारिश और जश्न के साथ किया गया।
पटना में रिहाई के बाद अनंत सिंह का भव्य स्वागत
बिहार की राजधानी पटना में बेऊर जेल से जैसे ही सोमवार शाम अनंत सिंह बाहर निकले, वहां का माहौल जश्न में बदल गया। हजारों समर्थकों ने नारेबाजी की और फूलों की बारिश कर उनका स्वागत किया।
मोकामा के विधायक अनंत सिंह, जिन्हें ‘छोटे सरकार’ के नाम से भी जाना जाता है, चार महीने बाद जमानत पर जेल से बाहर आए। इस दौरान पटाखों की आवाज से आसमान गूंज उठा और समर्थकों में उत्साह देखने को मिला।
दुलारचंद यादव हत्याकांड के बाद भी कायम समर्थन
अनंत सिंह का नाम दुलारचंद यादव हत्याकांड में आने के बावजूद उनके समर्थकों की संख्या और उत्साह में कमी नहीं दिखी। रिहाई के मौके पर भव्य आयोजन और भोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
उनकी गाड़ी के जेल से निकलते ही समर्थकों ने उन्हें घेर लिया, जिससे पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया।
90 के दशक से ‘छोटे सरकार’ के नाम से पहचान
अनंत सिंह की पहचान 1990 के दशक से मोकामा और पटना के इलाकों में ‘छोटे सरकार’ के रूप में रही है। उनका जन्म 1961 में नदवान गांव में एक भूमिहार परिवार में हुआ था।
उनके बड़े भाई दिलीप सिंह, जिन्हें ‘बड़े सरकार’ कहा जाता था, स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली माने जाते थे।
भाई की हत्या के बाद बढ़ा प्रभाव
बताया जाता है कि उनके भाई की हत्या नक्सलियों द्वारा कर दी गई थी, जिसके बाद अनंत सिंह ने बदला लेने का संकल्प लिया। इस घटना के बाद इलाके में उनका प्रभाव बढ़ता गया।
उसी दौर में बिहार में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल के दौरान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपनी पहचान मजबूत की।
इलाके में प्रभाव बनाए रखने की चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह माना जाता है कि उस समय जब कानून-व्यवस्था को लेकर चुनौतियां थीं, तब अनंत सिंह ने खुद को एक प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में स्थापित किया।
आज भी, कई आपराधिक मामलों में नाम आने के बावजूद, उनके समर्थकों के बीच उनका प्रभाव और रुतबा बना हुआ है, जो उनकी रिहाई के दौरान उमड़ी भीड़ से स्पष्ट दिखाई दिया।
