नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने देश भर में कीमती जलस्रोतों और आर्द्रभूमियों (Wetlands) की सुरक्षा न होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने सभी राज्यों और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे मौके पर जाकर आर्द्रभूमियों की पड़ताल करें और उनकी स्पष्ट सीमाएं तय करें। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब जीवन के लिए जरूरी जलस्रोतों की सुरक्षा नहीं हो रही हो, तो अदालतें इस गंभीर स्थिति को कतई नजरअंदाज नहीं कर सकतीं।
जीवन के अधिकार का अहम हिस्सा हैं जलस्रोत न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक जलस्रोत पेयजल के मुख्य स्रोत हैं, इसलिए इनका संरक्षण बेहद जरूरी है। अदालत ने कहा कि ये जलस्रोत भारतीय संविधान के तहत नागरिकों को मिले ‘जीवन के अधिकार’ (Article 21) के दायरे में आते हैं, इसलिए इनके संरक्षण में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
