रांची: 8 सितंबर 2021 को आरक्षण की मांग को लेकर हुए मुख्यमंत्री आवास घेराव मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने गोमिया के पूर्व विधायक लंबोदर महतो को आरोपमुक्त कर दिया है, जबकि आजसू पार्टी अध्यक्ष सुदेश महतो और सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी सहित अन्य पांच नेताओं पर आरोप बरकरार रखे गए हैं।
क्या है पूरा मामला? सितंबर 2021 में आजसू कार्यकर्ताओं ने सीएम आवास का घेराव किया था, जो बाद में हिंसक हो गया था। इस दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने और बैरिकेडिंग तोड़ने के आरोप में लालपुर थाना में सुदेश महतो, चंद्रप्रकाश चौधरी, लंबोदर महतो, रामचंद्र सहिस और शिवपूजन महतो समेत अन्य पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा सशर्त जमानत मिलने के बाद इन नेताओं ने निचली अदालत में सरेंडर किया था।
लंबोदर महतो को कैसे मिली राहत? 23 अप्रैल को आरोप तय करने की प्रक्रिया के दौरान, लंबोदर महतो की ओर से विधानसभा का उपस्थिति रजिस्टर साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया। इसमें दावा किया गया कि घटना के समय वे विधानसभा सत्र में मौजूद थे। कोर्ट ने इसी साक्ष्य के आधार पर उन्हें इस मामले से मुक्त कर दिया है।
फैसले पर उठे सवाल इस फैसले के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि सुदेश महतो ने भी उस दिन विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, बावजूद इसके उन पर आरोप तय किए गए हैं। वहीं, कुछ लोग घटना स्थल की तस्वीरों का हवाला देकर लंबोदर महतो की उपस्थिति पर भी सवाल उठा रहे हैं। इस विरोधाभासी स्थिति ने मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है।
