गिरिडीह: शहर में अतिक्रमण हटाने को लेकर एक बार फिर नगर निगम और स्थानीय दुकानदारों के बीच तीखी झड़प और तनाव की स्थिति पैदा हो गई। गुरुवार को उस समय माहौल बेहद गरमा गया जब गिरिडीह नगर निगम की टीम बुलडोजर (पीला पंजा) लेकर उन दुकानों को दोबारा ध्वस्त करने पहुंची, जिन्हें करीब आठ महीने पहले ही हटाया जा चुका था। हालांकि, चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच दुकानदारों के भारी आक्रोश और हंगामे को देखते हुए निगम की टीम को बिना कोई कार्रवाई किए ही बैरंग वापस लौटना पड़ा।
8 महीने से बेरोजगार हैं दुकानदार, पुनर्वास का वादा निकला खोखला!
पूरा मामला फोरलेन सड़क निर्माण से जुड़ा है। करीब आठ महीने पहले अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत लगभग 47 दुकानदारों की दुकानें तोड़ दी गई थीं। दुकानदारों का आरोप है कि उस वक्त प्रशासन ने उन्हें वैकल्पिक दुकानें (पुनर्वास) देने का भरोसा दिया था, लेकिन इतने महीने बीत जाने के बाद भी आज तक किसी को दुकान आवंटित नहीं की गई। रोजगार छिन जाने के कारण ये परिवार लंबे समय से आर्थिक तंगी और भुखमरी की कगार पर हैं।
दोबारा निर्माण की खबर पर पहुंची थी टीम, हुआ भारी विरोध
गुरुवार को नगर निगम को सूचना मिली थी कि प्रभावित दुकानदार अपनी रोजी-रोटी के लिए उसी टूटी हुई जगह पर दोबारा अस्थाई निर्माण कर रहे हैं। इस इनपुट के आधार पर सहायक नगर आयुक्त अशोक हंसदा के नेतृत्व में निगम की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन जैसे ही वहां बुलडोजर पहुंचा, दुकानदार और उनके परिवार सड़कों पर उतर आए और उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। दुकानदारों का गुस्सा देखकर प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े।
भू-माफियाओं और रसूखदारों पर लगा गंभीर आरोप
दुकानदारों ने इस पूरी कार्रवाई के पीछे एक बड़ी साजिश की आशंका जताई है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण के नाम पर पहले ही जरूरत से ज्यादा जमीन खाली करा ली गई थी। अब नगर निगम की आड़ में पूरे प्लॉट को खाली कराकर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। दुकानदारों ने सीधे तौर पर कुछ रसूखदार लोगों और भू-माफियाओं पर जमीन हड़पने का आरोप लगाया है।
फिलहाल क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पीड़ित दुकानदारों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें वैकल्पिक जगह या दुकान नहीं मिल जाती, वे अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।
