रांची कॉलेज में 23 साल बाद शहीद सुधीर साहू की प्रतिमा का अनावरण, झारखंड में फिर गरमाई ‘स्थानीय नीति’ की बहस

रांची: झारखंड में ‘स्थानीय नीति’ आंदोलन का चेहरा रहे छात्र नेता शहीद सुधीर साहू की प्रतिमा का आज (27 मई) रांची कॉलेज परिसर में भव्य अनावरण किया गया। 23 साल पहले इसी परिसर में हक और अधिकार की लड़ाई लड़ते हुए सुधीर साहू ने अपनी जान गंवाई थी। इस भावुक और ऐतिहासिक मौके पर राज्य सरकार के मंत्रियों, विधायकों और शहीद के परिजनों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी।

जब 2003 के आंदोलन से दहल उठा था झारखंड

यह प्रतिमा अनावरण उस ऐतिहासिक और दर्दनाक घटना की याद दिलाता है जिसने पूरे राज्य की सियासत को बदल कर रख दिया था।

  • 27 मई 2003: रांची कॉलेज परिसर में स्थानीय नीति की मांग को लेकर छात्र उग्र आंदोलन कर रहे थे।
  • इसी दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हुई हिंसक झड़प में छात्र सुधीर साहू को गोली लग गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई।
  • इस शहादत ने पूरे झारखंड को झकझोर दिया था और स्थानीयता की लड़ाई को एक नई और आक्रामक दिशा दी थी। दिलचस्प बात यह है कि उस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अमित कुमार महतो आज सूबे के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं और सिल्ली से विधायक हैं।

दिग्गज नेताओं और परिजनों ने दी श्रद्धांजलि

प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक दिग्गजों का जमावड़ा लगा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, विधायक अमित कुमार महतो और राज्यसभा सांसद महुआ माजी मौजूद रहीं। नेताओं ने शहीद के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।

“सुधीर साहू की शहादत बेकार नहीं जाएगी। उन्होंने जिस स्थानीय नीति और झारखंडियों के अधिकारों के लिए अपनी जान दी, उसे मुकाम तक पहुंचाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

शहादत के 23 साल बाद भी अधूरी है लड़ाई!

सुधीर साहू की प्रतिमा लगने के साथ ही राज्य में ‘स्थानीय नीति’ और ‘खतियान’ की सियासत एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि जिस अधिकार और डोमिसाइल पॉलिसी की मांग को लेकर 23 साल पहले सुधीर साहू ने अपनी कुर्बानी दी थी, वह लड़ाई आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। झारखंड में आज भी स्थानीयता, नियोजन नीति और मूलवासियों के अधिकारों को लेकर संघर्ष और बहस का दौर लगातार जारी है।

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