नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलाश जैसे कठिन चढ़ाई वाले पैदल मार्गों पर चलने वाले घोड़ों और खच्चरों (अश्ववंशीय पशुओं) के संचालन के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है। सरकार का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिसका सीधा असर अब यात्रा की व्यवस्थाओं और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
कोर्ट और NGT के आदेश के बाद तय हुई क्षमता
अपर सचिव संतोष बडोनी द्वारा जारी शासनादेश के मुताबिक, उत्तराखंड उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के पर्यावरण और पशु क्रूरता संबंधी निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया है। नई SOP के तहत यात्रा मार्गों की वहन क्षमता (carrying capacity) तय कर दी गई है।
अब हर मार्ग पर रोजाना केवल तय संख्या में ही पशु चल सकेंगे:
- केदारनाथ यात्रा मार्ग: अधिकतम 5,000 घोड़े-खच्चर।
- हेमकुंड साहिब मार्ग: अधिकतम 1,050 घोड़े-खच्चर।
- यमुनोत्री यात्रा मार्ग: अधिकतम 595 घोड़े-खच्चर।
रजिस्ट्रेशन और ‘माइक्रोचिपिंग’ हुई अनिवार्य
अब कोई भी संचालक बिना वैध कागजातों के अपने पशुओं को यात्रा मार्ग पर नहीं ले जा सकेगा। नई नियमावली के तहत निम्नलिखित प्रक्रियाएं अनिवार्य कर दी गई हैं:
- कंपलसरी रजिस्ट्रेशन: सभी पशुओं का वार्षिक पंजीकरण संबंधित जिला पंचायत और जिला प्रशासन द्वारा किया जाएगा।
- सख्त स्वास्थ्य जांच: यात्रा पर जाने से पहले पशुओं का फिटनेस टेस्ट, घातक ‘ग्लैंडर्स’ बीमारी की जांच, ‘इयर टैगिंग’ और ‘माइक्रोचिपिंग’ कराना अनिवार्य होगा।
- 45 दिनों की वैलिडिटी: पशुओं को मिलने वाले स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की वैधता केवल 45 दिनों की होगी। इसके बाद पशु का दोबारा मेडिकल टेस्ट कराना होगा।
पोर्टल नोट: सरकार के इस फैसले से जहां एक तरफ बेजुबान जानवरों पर होने वाले अत्याचार और ओवरलोडिंग पर लगाम लगेगी, वहीं दूसरी तरफ पैदल रास्तों पर गंदगी और अव्यवस्था से भी तीर्थयात्रियों को राहत मिलेगी।
