रांची: झारखंड सरकार द्वारा JPSC और JSSC की 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को निरस्त करने के फैसले को हाईकोर्ट से फिलहाल कोई झटके का सामना नहीं करना पड़ा है। अदालत ने सरकार के इस फैसले पर तुरंत रोक लगाने (अंतरिम स्टे) की अभ्यर्थियों की याचिका को खारिज कर दिया है।
सोमवार को जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना इस आदेश पर रोक लगाना संभव नहीं है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को अपना विस्तृत जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश जारी किया है।
सिविल जज परीक्षा रद्द होने पर अभ्यर्थियों ने खटखटाया था दरवाजा यह विवाद मुख्यतः सिविल जज भर्ती परीक्षा सहित दर्जनों अन्य परीक्षाओं को अचानक रद्द किए जाने के बाद शुरू हुआ। सरकार के इस कदम से प्रभावित होकर राहुल सिंह, श्वेताभ पांडेय समेत करीब एक दर्जन अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बिना किसी ठोस और वैधानिक आधार के जारी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना हजारों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इसलिए, अदालत को इस आदेश पर अविलंब रोक लगानी चाहिए।
29 सितंबर को होगी अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 29 सितंबर तय की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार की ओर से पेश की जाने वाली दलीलों के बाद अदालत परीक्षाओं को रद्द रखने के फैसले को सही ठहराती है या अभ्यर्थियों को कोई राहत देती है।
