रांची: झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। संस्थान में तैनात करीब 400 होमगार्ड जवानों को हटाकर उनकी जगह पूर्व सैनिकों (सैप जवानों) को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की जा रही है। रिम्स की 66वीं शासी परिषद की बैठक में होमगार्ड के स्थान पर सैप जवानों की तैनाती के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है, जिसे अब चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
रिम्स प्रबंधन के अनुसार, अस्पताल परिसर में लगातार हो रहे हंगामे, मरीजों के परिजनों व डॉक्टरों के बीच बढ़ते विवाद और मारपीट की घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था बदलने की मुख्य वजहें:
- जूनियर डॉक्टरों पर हमला: पिछले साल 6 सितंबर को रिम्स के सर्जरी विभाग के सी-टू वार्ड में एक महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया था। इस दौरान आक्रोशित लोगों ने दो जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट भी की थी, जिसके विरोध में डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार किया था।
- लगातार विवाद और मारपीट की घटनाएं: इससे पहले अगस्त 2025 में इमरजेंसी में पीजी डॉक्टरों और पैरामेडिकल छात्रों के बीच मारपीट हुई थी, जबकि अगस्त 2024 में भी जूनियर डॉक्टरों और सुरक्षा कर्मियों के बीच झड़प की बात सामने आई थी। इन सभी घटनाओं ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
होमगार्ड की जगह सैप जवानों को क्यों दी जा रही जिम्मेदारी?
रिम्स प्रबंधन का मानना है कि अस्पताल के संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसी चुस्त और अनुशासित सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है, जो किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपट सके। सैप जवानों की तैनाती से इमरजेंसी, ट्रॉमा सेंटर और अन्य वार्डों में भीड़ को नियंत्रित करने तथा डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित माहौल देने में मदद मिलेगी।
रिम्स अधीक्षक डॉ. हिरेंद्र बिरुआ के मुताबिक, इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य अस्पताल की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी व सख्त बनाना है। फिलहाल, इस बदलाव की प्रक्रिया को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
