नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे सांसद अरुण भारती ने कहा है कि अफ्रीका महाद्वीप में शांति स्थापना के प्रयास पूरी तरह समावेशी होने चाहिए। इसमें महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ वहां की स्थानीय जरूरतों और प्राथमिकताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग (PBC) और अफ्रीकी संघ की शांति एवं सुरक्षा परिषद (AU-PSC) की नौवीं वार्षिक परामर्श बैठक को संबोधित करते हुए सांसद अरुण भारती ने राष्ट्रीय स्वामित्व के सिद्धांत को सर्वोपरि बताया।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहायता मांग आधारित हो
सांसद ने स्पष्ट किया कि शांति स्थापना से जुड़ी प्राथमिकताओं की पहचान करने की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित देश की सरकार की होती है। इसलिए किसी भी प्रकार की क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय सहायता पूरी तरह से मांग आधारित होनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, “यह मदद मेजबान देश के अनुरोध और उसकी सहमति से दी जानी चाहिए, जो उनकी प्राथमिकताओं के अनुरूप हो और राष्ट्रीय प्रयासों का विकल्प बनने के बजाय उनकी पूरक बने।” जमुई (बिहार) लोकसभा क्षेत्र से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद भारती ने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त भागीदारी और जमीनी दौरों पर भी यही नीति लागू होनी चाहिए।
PBC और AU-PSC के बीच सहयोग का स्वागत
बैठक के दौरान सांसद ने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग और अफ्रीकी संघ की सुरक्षा परिषद के बीच आपसी सहयोग को और मजबूत करने से जुड़े प्रस्तावों का स्वागत किया। इसमें संबंधित देशों की सहमति के आधार पर संभावित संयुक्त क्षेत्रीय दौरे और विशिष्ट देशों में आपसी सहयोग बढ़ाने जैसे बिंदु शामिल हैं।
