रांची: जमीन खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे बड़ा निवेश होता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही इसे कानूनी समस्या में बदल सकती है। झारखंड, खासकर रांची में जमीन विवाद के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए, खरीदारों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी होना अनिवार्य है।
दैनिक जागरण के विशेष कार्यक्रम ‘प्रश्न पहर’ में रांची के अवर निबंधक विवेक कुमार पांडेय ने जमीन खरीद से जुड़े आम सवालों के जवाब दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल म्यूटेशन कराने भर से मालिकाना हक की गारंटी नहीं मिलती।
सादा पट्टा और एग्रीमेंट पर भरोसा न करें
अक्सर लोग दलालों के कहने पर सिर्फ सादा पट्टा या एग्रीमेंट पर जमीन का सौदा कर लेते हैं। विवेक कुमार पांडेय के अनुसार, सादा पट्टा कानूनी रूप से अमान्य है और इसके आधार पर भविष्य में मालिकाना हक का दावा नहीं किया जा सकता। सिर्फ एग्रीमेंट करना भी सुरक्षित नहीं है, क्योंकि यह खरीदार को कानूनी अधिकार नहीं देता और विक्रेता उसी जमीन को किसी और को भी बेच सकता है। जमीन के असली मालिक की पुष्टि हमेशा अंचल कार्यालय के खतियान और रजिस्टर-2 से करनी चाहिए।
अधिग्रहित भूमि की रजिस्ट्री में खतरा
खरीद से पहले यह जांचना जरूरी है कि जमीन सरकार द्वारा अधिग्रहित तो नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अनजाने में अधिग्रहित जमीन की रजिस्ट्री करा लेता है, तो वह कानूनी रूप से अमान्य होगी। ऐसी स्थिति में खरीदार को न तो मुआवजा मिलेगा और न ही जमीन पर अधिकार। इसकी जानकारी जिला भू-अर्जन कार्यालय से ली जा सकती है।
सीएनटी एक्ट और म्यूटेशन की सच्चाई
झारखंड में जमीन के प्रकार को समझना बेहद जरूरी है। सीएनटी एक्ट के तहत अनुसूचित जनजाति (एसटी) की जमीन केवल उसी थाना क्षेत्र के दूसरे एसटी व्यक्ति को बेची जा सकती है। सामान्य वर्ग के लिए इस तरह की जमीन खरीदना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
म्यूटेशन को लेकर पाई जाने वाली भ्रांतियों को भी उन्होंने दूर किया। म्यूटेशन केवल सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया है। असली स्वामित्व के लिए वैध रजिस्ट्री, पंजी-2 में अपडेटेड एंट्री और जमीन का अधिग्रहण मुक्त होना अनिवार्य है।
कब्जा न मिलने पर कदम
यदि खरीदार के पास वैध रजिस्ट्री और म्यूटेशन के कागजात हैं, फिर भी जमीन पर कब्जा नहीं मिल रहा, तो उसे तुरंत संबंधित थाने में शिकायत करनी चाहिए। पुलिस प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि सही कागजात होने पर खरीदार को जमीन पर कब्जा दिलाए।
एसटी और अन्य जमीनों की बिक्री
सीएनटी एक्ट के अनुसार एसटी जमीन केवल दूसरे एसटी व्यक्ति को ही उसी थाना क्षेत्र में बेची जा सकती है। इसी तरह, एससी और ओबीसी की जमीन भी केवल उसी जिले के अन्य एससी/ओबीसी को बेची जा सकती है।
सिर्फ एग्रीमेंट पर खरीदना असुरक्षित
केवल एग्रीमेंट पर जमीन खरीदना सुरक्षित नहीं है। यह मालिकाना हक नहीं देता और विक्रेता जमीन किसी और को भी बेच सकता है। पंजी-2 रजिस्ट्री कार्यालय का रिकॉर्ड ही वैध स्वामित्व के लिए मान्य है।
सरकारी रिकॉर्ड की जांच जरूरी
खरीदार अक्सर दलाल या विक्रेता की बातों पर भरोसा कर लेते हैं और सरकारी रिकार्ड की पुष्टि नहीं करते। अंचल कार्यालय और निबंधन कार्यालय से दस्तावेजों की जांच किए बिना जमीन खरीदना सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है।
इसलिए रांची और झारखंड में जमीन खरीदने से पहले पूरी कानूनी जानकारी और सरकारी रिकॉर्ड की सत्यापित जांच बेहद जरूरी है।
