पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, क्योंकि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि इस बार चुनाव केवल दो चरणों में कराए जाएंगे।
पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। पूरे राज्य के चुनावी नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम सामने आते ही राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है और सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गए हैं।
अगर पिछले चुनाव की बात करें तो 2021 के विधानसभा चुनाव आठ चरणों में संपन्न कराए गए थे। उस समय पहला चरण 27 मार्च से शुरू हुआ था और अंतिम चरण 29 अप्रैल को पूरा हुआ था, जबकि नतीजे 2 मई 2021 को घोषित किए गए थे।
2021 के चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 294 में से 213 सीटों पर जीत हासिल कर लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की थी। वहीं भारतीय जनता पार्टी 77 सीटें जीतकर राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी। उस चुनाव में लेफ्ट और कांग्रेस का गठबंधन एक भी सीट नहीं जीत सका था।
इस बार चुनावी समीकरण भी बदले हुए नजर आ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने “एकला चलो” के नारे के साथ अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी भी पूरी ताकत के साथ अकेले मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर भी यह चर्चा तेज है कि पार्टी इस बार लेफ्ट के साथ गठबंधन के बजाय अकेले चुनाव लड़ने पर विचार कर सकती है, हालांकि इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसके अलावा हुमायूं कबीर की नई पार्टी भी इस बार चुनावी मैदान में उतरकर अपना राजनीतिक डेब्यू करने जा रही है।
अब सबकी नजर 4 मई पर टिकी है, जब यह साफ होगा कि पश्चिम बंगाल की सत्ता किसके हाथों में जाएगी।
