बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 30 मार्च 2026 को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि उन्होंने अभी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन उनके उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
बिहार में नीतीश कुमार का इस्तीफा, सीएम पद को लेकर चर्चा तेज
बिहार में लंबे समय से मुख्यमंत्री पद संभाल रहे नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि, अभी तक उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है और वे फिलहाल इस पद पर बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री पद पर अभी बरकरार हैं नीतीश कुमार
स्पष्ट रूप से कहा जाए तो विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के बावजूद नीतीश कुमार अभी भी बिहार के मुख्यमंत्री हैं। वे तब तक इस पद पर बने रहेंगे जब तक वे औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दे देते।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वे राज्यसभा में शपथ लेने से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नियम क्या कहते हैं?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना विधानमंडल का सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक मुख्यमंत्री या मंत्री पद पर रह सकता है।
इस प्रावधान के तहत, नीतीश कुमार संसद में संभावित भूमिका संभालने के बाद भी सीमित अवधि तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं।
उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें तेज
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब सभी की नजरें उनके संभावित उत्तराधिकारी पर टिक गई हैं। राजनीतिक चर्चाओं में यह संकेत मिल रहा है कि भारतीय जनता पार्टी अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे कर सकती है।
इस दौड़ में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है।
पहले भी नहीं लड़ा था विधानसभा चुनाव
हाल ही में हुए 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने चुनाव नहीं लड़ा था। इसी कारण वे विधायक नहीं हैं और विधान परिषद के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे थे।
मुख्यमंत्री बनने के लिए किसी भी व्यक्ति का विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना आवश्यक होता है।
राजनीतिक करियर: गठबंधन बदलावों के बीच स्थिरता
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर 1985 में विधायक के रूप में शुरू हुआ था। इसके बाद वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे।
वे पहली बार 2005 में एनडीए के सहयोग से बिहार के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उनका कार्यकाल कई बार गठबंधन बदलावों से प्रभावित रहा, जिसमें 2013, 2017, 2022 और 2024 में भाजपा और महागठबंधन के बीच बदलाव शामिल हैं।
इन बदलावों के बावजूद उन्होंने 2025 में एक बार फिर बड़ी जीत हासिल की और रिकॉर्ड दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
