दाखिल-खारिज में हेराफेरी और भ्रष्टाचार से तंग आकर मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक, आत्महत्या की धमकी के बाद मचा हड़कंप

झारखंड के हजारीबाग जिले से प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार की एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जिले के कटकमदाग अंचल कार्यालय में जमीन दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के मामलों में कथित अनियमितता से परेशान होकर एक युवक शुक्रवार को मोबाइल टावर पर चढ़ गया। टावर पर चढ़कर युवक ने न्याय न मिलने पर आत्महत्या करने की चेतावनी दी, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने अंचल कार्यालय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सड़क जाम कर दिया।

14 साल से कर रहा था खेती, दूसरे के नाम हुई जमीन

टावर पर चढ़े युवक की पहचान कटकमदाग निवासी विकास कुमार के रूप में हुई है। विकास का आरोप है कि वह पिछले करीब 14 वर्षों से पांच एकड़ जमीन पर खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा है। इसके बावजूद अंचल कार्यालय की मिलीभगत से उस जमीन का दाखिल-खारिज किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर कर दिया गया।

विकास ने बताया कि इस हेराफेरी के खिलाफ उसने कई बार अंचल कार्यालय के चक्कर काटे, लेकिन उसकी एक न सुनी गई। पिछले छह महीनों से उसे लगातार दौड़ाया जा रहा है। युवक का सीधा आरोप है कि अंचल कार्यालय में बिना रिश्वत और ऊंचे रसूख के कोई काम नहीं हो रहा है।

प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी, मौके पर भारी तनाव

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विकास कुमार टावर की ऊंचाई पर जाकर प्रशासन और अंचलाधिकारी (CO) के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगा। उसने साफ कहा कि जब तक अंचलाधिकारी उसकी जमीन के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करते और म्यूटेशन की गड़बड़ी को ठीक नहीं किया जाता, तब तक वह नीचे नहीं उतरेगा।

इस घटना से आक्रोशित स्थानीय ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार का विरोध करते हुए सड़क जाम कर दी और सीओ के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन संबंधी मामलों को लेकर आम लोगों को महीनों और सालों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन भ्रष्ट कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

मौके पर पहुंचे अधिकारी

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों द्वारा युवक को समझा-बुझाकर सुरक्षित नीचे उतारने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और अंचल कार्यालयों की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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