पलामू टाइगर रिजर्व के ट्रैकर्स आंदोलन पर, वुल्फ सेंचुरी के श्रमिकों को अप्रैल से नहीं मिला वेतन

पलामू टाइगर रिजर्व के ट्रैकर्स आंदोलन पर, वुल्फ सेंचुरी के श्रमिकों को अप्रैल से नहीं मिला वेतन

पलामू: देशभर में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के निर्देशन में टाइगर एस्टीमेशन का कार्य जारी है। इसी क्रम में झारखंड में भी टाइगर एस्टीमेशन के दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस बीच पलामू टाइगर रिजर्व के करीब 400 श्रमिक और ट्रैकर आंदोलन पर उतर आए हैं। श्रमिकों और ट्रैकर्स ने 30 दिसंबर से बड़े आंदोलन की घोषणा की है।

आंदोलन के पहले चरण में झारखंड वन श्रमिक यूनियन के बैनर तले पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक कार्यालय के सामने धरना दिया गया। यूनियन ने अपनी 10 सूत्री मांगें रखीं और चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आने वाले महीनों में अनिश्चितकालीन हड़ताल कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आंदोलनकारी वुल्फ सेंचुरी में कार्यरत श्रमिकों की अप्रैल माह से लंबित मजदूरी के भुगतान की मांग कर रहे हैं।

समझौता लागू करने की मांग

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में पीटीआर निदेशक और यूनियन के बीच हुए समझौते को लागू करना, 10 वर्षों से कार्यरत श्रमिकों की सेवा को नियमित करना, ट्रैकर बलराम यादव के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेना, समय पर मजदूरी का भुगतान करना तथा बिना कारण श्रमिकों की छंटनी और मुकदमे दर्ज नहीं करने की मांग शामिल है।

ड्यूटी के अनुरूप नहीं मिल रही मजदूरी

यूनियन ने सभी श्रमिकों को पहचान पत्र जारी करने और कुशल श्रमिकों को श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा निर्धारित कोटिवार मजदूरी देने की मांग भी उठाई है। इस आंदोलन को लेकर झारखंड वन श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष सिद्धनाथ झा ने कहा कि ट्रैकर दिन-रात मेहनत कर वन्य जीवों की सुरक्षा में लगे रहते हैं और 24 घंटे ड्यूटी निभाते हैं, जबकि सामान्य रूप से आठ घंटे की ड्यूटी मानी जाती है। इसके बावजूद ट्रैकर्स को उनकी मेहनत के अनुरूप भुगतान नहीं किया जा रहा है।

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