रांची: झारखंड की राजधानी रांची का सदर अस्पताल अब सिर्फ एक आम जिला अस्पताल नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स (RIMS) को कड़ी टक्कर दे रहा है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तैनाती और आधुनिक मैनेजमेंट के कारण अब यह मरीजों की पहली पसंद बनता जा रहा है। हालात यह हैं कि कई मामलों में यहाँ आने वाले मरीजों की संख्या रिम्स से भी ज्यादा दर्ज की जा रही है।
रोजाना 2000 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे OPD
अस्पताल प्रबंधन के आंकड़ों के मुताबिक, सदर अस्पताल की ओपीडी (OPD) में हर दिन औसतन 2000 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि अब सिर्फ रांची ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों और दूसरे जिलों से भी लोग इलाज के लिए यहाँ आ रहे हैं।
इनडोर वार्ड फुल, बेड बढ़ाने की मांग
मरीजों की इस भारी भीड़ का असर अस्पताल के इनडोर वार्डों पर भी साफ दिख रहा है। अस्पताल के कई महत्वपूर्ण विभाग इस वक्त पूरी तरह फुल चल रहे हैं। बेड की बढ़ती किल्लत को देखते हुए, खासकर ऑन्कोलॉजी (कैंसर) विभाग में बेड की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है।
स्पेशलिस्ट और ‘ऑन कॉल’ डॉक्टरों की सेवा ने बदला रुख
सदर अस्पताल की इस सफलता के पीछे डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता एक बड़ी वजह है। वर्तमान में यहाँ मेडिसिन, सर्जरी, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग), आई, और ईएनटी जैसे प्रमुख विभागों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा ‘ऑन कॉल’ डॉक्टरों की चौबीसों घंटे उपलब्धता ने भी मरीजों का भरोसा जीता है। अब मरीजों को छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए रिम्स या महंगे प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
प्रशासन के सामने अब इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, मुफ्त दवाइयों की व्यवस्था और डॉक्टरों के अच्छे व्यवहार ने सदर अस्पताल की तस्वीर बदली है। हालांकि, मरीजों की यह बढ़ती संख्या अस्पताल प्रशासन के लिए एक नई चुनौती भी खड़ी कर रही है। कई विभागों में बेड कम पड़ने लगे हैं। इस पर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बढ़ती भीड़ को देखते हुए संसाधनों और सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है।
