Ambedkar Jayanti 2026: बाबा भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती, 10 विचार

भारत में संविधान निर्माता B. R. Ambedkar की 135वीं जयंती 14 अप्रैल 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर लोग उन्हें याद कर उनके विचारों और योगदान को नमन कर रहे हैं।

देशभर में मनाई जा रही अंबेडकर जयंती

भारत में संविधान निर्माता B. R. Ambedkar की 135वीं जयंती आज, 14 अप्रैल 2026 को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर देशभर में लोग उन्हें स्मरण कर रहे हैं और श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

महू में हुआ था जन्म

B. R. Ambedkar का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में एक दलित परिवार में हुआ था। वे स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री भी रहे।

उन्होंने अपना जीवन सामाजिक समानता, अधिकारों और शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित किया।

समाज सुधार और शिक्षा पर जोर

अंबेडकर ने शोषित, दलित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना।

उन्होंने महिलाओं और श्रमिक वर्ग के अधिकारों के समर्थन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भेदभाव के खिलाफ संघर्ष

अपने जीवन में B. R. Ambedkar को छुआछूत और असमानता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसके खिलाफ शिक्षा और लेखनी के माध्यम से आवाज उठाई।

उन्होंने समाज को समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य किया।

अंबेडकर के विचार आज भी प्रेरणा

उनका मूल मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है। वे शिक्षा को प्रगति की नींव मानते थे और कहते थे कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए ज्ञान आवश्यक है।

बाबा साहेब के 10 प्रेरणादायक विचार

  • “मंदिर जाने वाले लोगों की लंबी कतारें जिस दिन पुस्तकालय की ओर बढ़ेगी, उस दिन देश को महाशक्ति बनने से कोई रोक नही सकता।”
  • “तुम्हारे पैरों में जूते भले ना हों, हाथों में किताब जरूर होनी चाहिए।”
  • “सफलता कभी पक्की नहीं होती है और असफलता भी अंतिम नहीं होती है। इसलिए अपनी कोशिश तब तक जारी रखो जब तक आपकी जीत इतिहास ना बन जाए।”
  • “लोकतंत्र केवल सरकार का एक रूप नहीं, यह मुख्य रूप से संयुक्त संचारित अनुभव का एक तरीका है।”
  • “अगर आप में गलत को गलत कहने की क्षमता नही है, तो आपकी प्रतिभा व्यर्थ है। शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।”
  • “मनुष्य का अंतिम लक्ष्य ज्ञान का विकास होना चाहिए।”
  • “मैं किसी समुदाय की प्रगति का आकलन इस आधार पर करता हूँ कि महिलाओं ने कितनी प्रगति हासिल की है।”
  • “मैं उस धर्म को नहीं मानता जो मनुष्य को मनुष्य से अलग करता हो।”
  • “जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए।”
  • “जो लोग अपने इतिहास को भूल जाते हैं, वे कभी नया इतिहास नहीं बना सकते।”
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