रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों और सवालों के घेरे में है। मामला ‘झारखंड मैट्रिक स्तर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023’ से जुड़ा है, जहाँ एक ही विज्ञापन और एक ही परीक्षा के दो अलग-अलग नतीजों ने अभ्यर्थियों को मानसिक तनाव में डाल दिया है। परीक्षा में शामिल हुए कीटपालक पद के उम्मीदवारों को जहाँ 6 महीने पहले ही नियुक्ति पत्र सौंप दिया गया, वहीं कुशल शिल्प एवं समकक्ष पद के अभ्यर्थी आज भी अपनी अंतिम मेरिट सूची (Final Merit List) के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
जुलाई 2025 में आया था रिजल्ट, आधी प्रक्रिया अटकी
आयोग ने साल 2023 में इस भर्ती का विज्ञापन निकाला था, जिसके बाद सितंबर 2024 में परीक्षा आयोजित की गई। इसके बाद 22 जुलाई 2025 को परीक्षा परिणाम घोषित हुआ और 26 जुलाई 2025 से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (दस्तावेज सत्यापन) की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई।
हैरानी की बात यह है कि इसके तुरंत बाद नवंबर 2025 में कीटपालक पद के अभ्यर्थियों की फाइनल मेरिट सूची जारी कर उन्हें जॉइनिंग दे दी गई, लेकिन कुशल शिल्प के पद पर ताला लटका रहा।
विभाग और आयोग के बीच फुटबॉल बने अभ्यर्थी
परेशान अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से JSSC और उद्योग विभाग के कार्यालयों की दौड़ लगा रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जब वे JSSC दफ्तर जाते हैं, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि मामला उद्योग विभाग के मंतव्य (Opinion) के लिए लंबित है। वहीं जब वे उद्योग विभाग जाते हैं, तो वहां से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। दोनों विभागों के इस टालमटोल रवैये से उम्मीदवारों में भारी असंतोष और नाराजगी है।
187 पदों के मुकाबले सिर्फ 40 का वेरिफिकेशन, उठ रहे सवाल
इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में एक और बड़ा पेंच सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, कुशल शिल्प एवं समकक्ष पद के लिए कुल 187 रिक्तियां (Vacancies) निकाली गई थीं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि आयोग द्वारा सिर्फ 40 अभ्यर्थियों का ही दस्तावेज सत्यापन (DV) कराया गया।
पदों की संख्या के मुकाबले इतने कम अभ्यर्थियों को बुलाए जाने और उसके बाद भी फाइनल रिजल्ट जारी न होने से अब पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि सरकार और आयोग जल्द से जल्द स्थिति साफ करे और उनकी अंतिम मेरिट सूची जारी कर नियुक्ति की प्रक्रिया को पूरा करे।
