नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल की जमाखोरी रोकने और आम जनता तक ईंधन की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत (Industrial, Commercial & Institutional) उपभोक्ता रिटेल पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा (बल्क) में ईंधन नहीं खरीद सकेंगे। इसके साथ ही, खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री की एक अधिकतम सीमा भी तय कर दी गई है।
सरकार का यह नया नियम शुरुआती तौर पर 90 दिनों (3 महीने) के लिए लागू किया गया है।
अब एक दिन में कितना मिलेगा डीजल?
नए नियमों के तहत आम उपभोक्ताओं और वाहनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डीजल की खुदरा बिक्री की सीमा तय की गई है:
- डीजल की लिमिट: अब कोई भी ग्राहक या वाहन, प्रति दिन अधिकतम 200 लीटर तक ही डीजल खरीद सकेगा।
- पेट्रोल पर असर: यह पाबंदी मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर होने वाली डीजल की खरीद और जमाखोरी को रोकने के लिए लगाई गई है, ताकि आम वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
किस पर लागू होगा यह नया नियम?
यह कदम उन बड़े कमर्शियल खरीदारों को रोकने के लिए उठाया गया है जो रिटेल पंपों से भारी मात्रा में डीजल उठा रहे थे, जिससे कई इलाकों में आम जनता के लिए ईंधन की किल्लत होने लगी थी।
- इनके लिए पेट्रोल पंप से खरीद बंद: औद्योगिक इकाइयां (Factories), बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान और संस्थागत उपभोक्ता अब आम पेट्रोल पंपों से ईंधन नहीं ले पाएंगे।
- वैकल्पिक व्यवस्था: इन बड़े उपभोक्ताओं को अब केवल निर्धारित बल्क सप्लाई केंद्रों (Bulk Supply Centers) या सरकार द्वारा अधिकृत आपूर्ति चैनलों के जरिए ही सीधे कंपनियों से ईंधन खरीदना होगा।
सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
आधिकारिक कारण: सरकार के अनुसार, कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में उद्योगों और बड़े व्यावसायिक खरीदारों द्वारा खुदरा पेट्रोल पंपों से बड़े पैमाने पर डीजल उठाया जा रहा था। इस वजह से आम उपभोक्ताओं के लिए खुदरा आपूर्ति (Retail Supply) प्रभावित हो रही थी। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बाजार में संतुलन बनाना, जमाखोरी पर लगाम लगाना और आम नागरिकों के लिए पेट्रोल-डीजल की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
