रांची: करीब दो दशक लंबे चले कानूनी ट्रायल के बाद चैनपुर अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी ब्रजेश कुमार सिंह को बड़ी राहत मिली है। विजिलेंस (अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की विशेष अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के कारण उन्हें रिश्वत के आरोपों से पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला जनवरी 2007 का है, जब विजिलेंस की टीम ने ब्रजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने जमीन का पट्टा दिलाने के एवज में शिकायतकर्ता और उसके भाई से 16,000 रुपये की घूस मांगी थी। इस मामले में विजिलेंस ने अपनी जांच के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी।
अदालत में बचाव पक्ष की दलीलें
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील अनिल सिंह महाराणा ने कोर्ट के सामने पुख्ता तर्क रखे। उन्होंने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता के पिता को वह जमीन का पट्टा पहले ही मिल चुका था, जिसके नाम पर रिश्वत मांगने का दावा किया जा रहा था। वकील ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष के आरोप जमीनी तथ्यों से बिल्कुल मेल नहीं खाते हैं।
16 गवाहों के बाद भी साबित नहीं हुआ आरोप
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अभियोजन पक्ष ने शिकायतकर्ता समेत कुल 16 गवाहों को कोर्ट में पेश किया। इसके बावजूद वे ब्रजेश कुमार सिंह के खिलाफ लगे आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहे।
