पटना: बिहार के 500 से अधिक मॉडल विद्यालयों की इमारतों को भगवा (Saffron) रंग में रंगे जाने के राज्य सरकार के आदेश के बाद सूबे की राजनीति में गर्माहट आ गई है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दल इस फैसले का बचाव कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों, विशेषकर AIMIM ने इसे राज्य में शिक्षा व्यवस्था के “भगवाकरण” का प्रयास करार दिया है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में ऐसे 551 मॉडल विद्यालयों का उद्घाटन किया था। शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार, ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ नाम वाले इन विद्यालयों को गुलाबी, आसमानी या पीले जैसे पारंपरिक रंगों के बजाय अब भगवा रंग से रंगा जाएगा।
विपक्ष का आरोप: “टैक्सपेयर्स के पैसों से धर्म विशेष को बढ़ावा”
विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों के जरिए पूरे देश का भगवाकरण करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे का इस्तेमाल किसी एक धर्म को बढ़ावा देने के लिए करना लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द के लिए सही नहीं है।
सरकार की सफाई: “भगवा देवी सरस्वती और समृद्धि का प्रतीक”
विपक्ष के हमलों का करारा जवाब देते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार शिक्षा के आधुनिकीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा:
“रंग के आधार पर विभाजन नहीं होना चाहिए। हम सभी धर्मों के बच्चों के लिए हाई-टेक शिक्षा व्यवस्था तैयार कर रहे हैं। भगवा रंग देवी सरस्वती और समृद्धि का प्रतीक है। हम राज्य को फिर से ‘चरवाहा विद्यालय’ के दौर में नहीं लौटने देंगे।”
वहीं, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने विपक्ष को नसीहत दी कि उन्हें स्कूल के रंग पर राजनीति करने के बजाय राजग (NDA) सरकार के दो दशकों के दौरान शिक्षा सुधारों पर सकारात्मक चर्चा करनी चाहिए।
