नयी दिल्ली:
केंद्रीय राज्य मंत्री और केरल के त्रिशूर से भाजपा सांसद सुरेश गोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उनकी उस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने अपने लोकसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर केरल उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता एवं ‘ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन’ (AIYF) के नेता बिनॉय ए.एस. को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्या है पूरा मामला?
2024 के लोकसभा चुनाव में केरल की त्रिशूर सीट से विजयी हुए केंद्रीय पर्यटन और पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी के निर्वाचन को बिनॉय ए.एस. ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत कथित तौर पर भ्रष्ट आचरण और नियमों का उल्लंघन किया गया था।
हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका
सुरेश गोपी ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि यह चुनाव याचिका विचार योग्य (Maintainable) नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। हालांकि, 1 अप्रैल को केरल उच्च न्यायालय ने उनकी यह दलील खारिज कर दी और कहा कि मामले में लगाए गए आरोपों पर सुनवाई की आवश्यकता है।
हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ अब केंद्रीय मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई शुरू करते हुए संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया है।
