रांची में रिम्स परिसर को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए प्रशासन ने गुरुवार को अभियान तेज किया, लेकिन डीआईजी ग्राउंड क्षेत्र में इसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा। सुबह से ही बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण जुटे हुए थे। जैसे ही प्रशासनिक टीम आगे बढ़ी, ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया।
ग्रामीणों की स्पष्ट मांग थी कि पहले इलाके में बनी बड़ी-बड़ी पक्की इमारतों पर कार्रवाई की जाए, उसके बाद वे स्वयं अपने निर्माण हटाने को तैयार हैं। स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रशासन ने मसना स्थल की बाउंड्री का एक हिस्सा ढहा दिया। इससे ग्रामीण आक्रोशित हो उठे और माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालांकि, दंडाधिकारी और पुलिस के हस्तक्षेप से हालात काबू में आ गए।
कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद डीआईजी ग्राउंड में बने पक्के निर्माणों को नहीं छुआ गया और केवल एक कच्चे रिक्शा गैरेज को हटाकर औपचारिक कार्रवाई की गई। जबकि रिम्स की करीब नौ एकड़ जमीन पर कई अवैध पक्के मकान अब भी खड़े हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन कमजोर लोगों पर कार्रवाई कर रहा है, जबकि बड़े अवैध कब्जों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
दो दिन पहले ही अदालत ने रिम्स और जिला प्रशासन को 72 घंटे के भीतर परिसर से सभी अतिक्रमण हटाने का सख्त निर्देश दिया था। इससे पहले भी प्रशासन अचानक अभियान शुरू कर पीछे हट चुका था, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। गुरुवार का अभियान भी विरोध और स्पष्ट रणनीति के अभाव में अधूरा रह गया।
रिम्स परिसर में वर्षों से मंदिर, दुकानें, घर, गैरेज, शेड और कई पक्के निर्माणों के रूप में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण मौजूद है। प्रशासनिक कमजोरी और राजनीतिक-सामाजिक दबावों की वजह से अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी यह साफ हो गया है कि रिम्स की जमीन को पूरी तरह खाली कराना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
