Change of Power in Jharkhand:
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उन्हें न तो कोई डरा सकता है और न ही डिगा सकता है। उन्होंने भले ही किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत किस ओर है, इसे समझना मुश्किल नहीं है। उनका यह बयान इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि हाल के दिनों में उनकी दिल्ली यात्रा को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।
आमतौर पर हेमंत सोरेन जब भी किसी दौरे पर जाते हैं या किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात करते हैं, तो उससे जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जाती हैं। लेकिन हालिया दिल्ली दौरे के दौरान ऐसी कोई तस्वीर सामने नहीं आई। इसी चुप्पी को आधार बनाकर यह कयास लगाए जाने लगे कि वे कांग्रेस और आरजेडी से दूरी बनाकर भाजपा के साथ सरकार बनाने की तैयारी में हैं। इसी पृष्ठभूमि में उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी।
विधानसभा में दिया बयान, भाजपा पर इशारा
विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें डराने या दबाव में लाने की कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग सरकार को घेरने का दावा करते हैं, वे सदन में मौजूद तक नहीं थे। दिलचस्प बात यह रही कि उस समय विधानसभा में भाजपा का कोई विधायक उपस्थित नहीं था। इससे यह साफ हो गया कि उनका निशाना विपक्ष, खासकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की ओर था।
भाजपा के करीब जाने की अफवाहें
झारखंड स्थापना दिवस की रजत जयंती के कार्यक्रमों के बाद हेमंत सोरेन पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली गए थे और कुछ दिन वहां रुके। इस दौरे के उद्देश्य को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई, जिसके बाद मीडिया में तरह-तरह की खबरें चलने लगीं। दावा किया गया कि हेमंत सोरेन की मुलाकात भाजपा के एक शीर्ष नेता से हुई है और इसके मायने यह निकाले गए कि झारखंड में सत्ता का समीकरण बदल सकता है।
यहां तक कहा जाने लगा कि जेएमएम कांग्रेस और आरजेडी को गठबंधन से बाहर कर भाजपा के साथ नई सरकार बना सकती है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नाम तक तय किए जाने लगे और बाबूलाल मरांडी को संभावित डिप्टी सीएम बताया जाने लगा। हालांकि, इन अटकलों के पीछे कोई ठोस आधार नहीं था।
अफवाहों की निकली हवा
दिल्ली से लौटने के बाद भी हेमंत सोरेन की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला, जिससे इन चर्चाओं को बल मिलता। विधानसभा में दिए गए उनके हालिया बयान के बाद यह लगभग साफ हो गया कि सरकार बदलने की खबरें महज अफवाह थीं। केंद्र सरकार पर झारखंड की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं।
आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही सरकार
हालांकि राजनीतिक स्थिरता के बावजूद झारखंड सरकार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है। राज्य की माली हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कई योजनाओं को जारी रखना मुश्किल हो रहा है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में बताया कि जरूरी खर्चों के लिए सरकार को करीब 16 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेना पड़ा है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड का बकाया भुगतान नहीं कर रही है।
स्थिति यह है कि कई ठेकेदारों ने भुगतान न मिलने के कारण विकास कार्य रोक दिए हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने भी स्वीकार किया है कि विभाग के पास फिलहाल भुगतान के लिए धन नहीं है और ठेकेदारों का छह महीने से बकाया पड़ा है। इन हालातों से साफ है कि झारखंड सरकार भारी आर्थिक दबाव का सामना कर रही है।
