झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में पुल ढहने की पुरानी घटनाओं और उनकी जांच में हो रही लंबी देरी पर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने धनबाद, पलामू और गुमला जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को इन मामलों से जुड़ी एफआईआर की जांच जल्द पूरी कर तीन महीने के भीतर संबंधित अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने पंकज कुमार यादव द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम आदेश दिया।
एक दशक से लंबित थे मामले
जनहित याचिका में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पुल ढहने की घटनाओं, निर्माण कार्यों में बरती गई कथित अनियमितताओं और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई में देरी का मुद्दा उठाया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि धनबाद, पलामू और गुमला में पुलों के टूटने से जुड़े ये मामले वर्ष 2009 से 2015 के बीच दर्ज किए गए थे, लेकिन एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इनकी जांच पूरी नहीं हो सकी है। हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आपराधिक मामलों की जांच को इतने लंबे समय तक लंबित रखना अनुचित है, जिससे न्याय मिलने में बाधा आती है।
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को भी निर्देश
अदालत ने केवल पुलिस जांच तक ही सीमित नहीं रहते हुए, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को भी इन मामलों में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ चल रही लंबित विभागीय कार्रवाइयों की कड़ी निगरानी करने और नियमानुसार तीन महीने के भीतर उन्हें तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट के इस सख्त कदम से राज्य में प्रशासनिक जवाबदेही तय होने की उम्मीद है।
