LPG vs PNG: भारत में रसोई गैस की खपत, जानिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति

नई दिल्ली: भारत में घरेलू रसोई गैस के रूप में आज भी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का दबदबा कायम है। देश में 32 करोड़ से अधिक उपभोक्ता LPG का उपयोग कर रहे हैं, जबकि पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अभी भी मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। पिछले एक दशक में सरकारी योजनाओं और वितरण नेटवर्क के विस्तार के कारण LPG की पहुंच देश के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक बढ़ी है।

ऊर्जा से जुड़े राष्ट्रीय आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में LPG और PNG के उपयोग के बीच अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है।

LPG की खपत में पिछले 30 वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार भारत में LPG की कुल खपत में पिछले तीन दशकों में तेज वृद्धि हुई है।

  • 1998-99: 4,46,000 मीट्रिक टन
  • 2025-26 (अनुमान): 27,54,000 मीट्रिक टन

यह लगभग छह गुना बढ़ोतरी को दर्शाता है।

2000 और 2010 के दशक में LPG की खपत सबसे तेज बढ़ी, जब औसत वार्षिक वृद्धि दर 8% से 11% के बीच रही।

उज्ज्वला योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी पहुंच

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) ने ग्रामीण भारत में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस योजना के तहत गरीब परिवारों को मुफ्त या सब्सिडी वाले LPG कनेक्शन दिए गए।

PMUY के तहत प्रमुख राज्यों में लाभार्थियों की संख्या:

  • उत्तर प्रदेश: 1.88 करोड़
  • पश्चिम बंगाल: 1.24 करोड़
  • बिहार: 1.18 करोड़
  • मध्य प्रदेश: 89 लाख
  • राजस्थान: 74.3 लाख

इन राज्यों में ग्रामीण आबादी का अनुपात भी काफी अधिक है, जिसके कारण LPG कनेक्शन की मांग ज्यादा देखी गई।

शहरी परिवार करते हैं ज्यादा LPG का इस्तेमाल

हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में LPG कनेक्शन की संख्या ज्यादा है, लेकिन शहरी परिवारों की खपत अधिक है।

औसत मासिक LPG खपत:

  • दिल्ली: 11.4 किलोग्राम
  • उत्तर प्रदेश: 7.7 किलोग्राम
  • बिहार: 6.7 किलोग्राम

एक घरेलू LPG सिलेंडर में 14.2 किलोग्राम गैस होती है। इसका मतलब है कि कई ग्रामीण परिवार एक सिलेंडर को लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं और कई बार लकड़ी या अन्य पारंपरिक ईंधन का भी सहारा लेते हैं।

राज्यों में LPG खपत का पैटर्न

भारत में LPG उपभोक्ताओं की संख्या के हिसाब से उत्तर प्रदेश सबसे आगे है।

  • देश के कुल LPG उपभोक्ताओं का लगभग 15% हिस्सा उत्तर प्रदेश में है।
  • हालांकि प्रति परिवार औसत खपत के मामले में यह राज्य 22वें स्थान पर है।

यह दर्शाता है कि कनेक्शन की संख्या ज्यादा होने के बावजूद वास्तविक उपयोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग है।

PNG का विस्तार अभी भी सीमित

PNG की आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से होती है, जिसके लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। इसी कारण यह अभी मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित है।

पश्चिमी भारत सबसे आगे

  • लगभग 71.8 लाख PNG कनेक्शन
  • LPG उपभोक्ताओं की तुलना में 15.7% पहुंच

गुजरात PNG के मामले में सबसे आगे है, जहां लगभग 39.7% घरों में PNG पहुंच है।
महाराष्ट्र में भी लगभग 36.17 लाख PNG कनेक्शन हैं।

उत्तर भारत में स्थिति

  • लगभग 41.37 लाख PNG कनेक्शन
  • करीब 6.1% पहुंच
  • दिल्ली: लगभग 29.3%
  • उत्तर प्रदेश: लगभग 16.5 लाख कनेक्शन

पूर्वी और दक्षिण भारत में सीमित विस्तार

  • पूर्वी भारत: लगभग 4.48 लाख कनेक्शन (1.4% पहुंच)
  • दक्षिण भारत: लगभग 10.36 लाख कनेक्शन (1.5% पहुंच)

बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में LPG उपभोक्ता अधिक हैं, लेकिन पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर अभी सीमित है।

नॉर्थ-ईस्ट में बहुत कम पहुंच

नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में PNG की पहुंच बेहद कम है। यहां लगभग 1.2 लाख कनेक्शन ही हैं।

LPG वितरण नेटवर्क में बड़ा विस्तार

2014 के बाद भारत में LPG इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ा है।

  • LPG कनेक्शन: 14.52 करोड़ से बढ़कर 32.83 करोड़
  • डिस्ट्रीब्यूटर: 13,896 से बढ़कर 25,532
  • 90% से अधिक नए डिस्ट्रीब्यूटर ग्रामीण क्षेत्रों में

इसके अलावा:

  • 30.43 करोड़ उपभोक्ता PAHAL DBT स्कीम से जुड़े
  • 1.14 करोड़ परिवारों ने ‘गिव इट अप’ अभियान के तहत LPG सब्सिडी छोड़ी

उज्ज्वला परिवारों में LPG खपत बढ़ी

PMUY परिवारों में LPG उपयोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है:

  • 2019-20: 3.01 सिलेंडर प्रति वर्ष
  • 2023-24: 3.95 सिलेंडर
  • 2024-25: 4.34 सिलेंडर (अनुमान)

योजना शुरू होने के बाद से PMUY परिवारों को 222 करोड़ से अधिक LPG रिफिल दिए जा चुके हैं।

ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं

भारत अपनी LPG जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है। इनमें से करीब 90% सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आती है।

यह दुनिया के सबसे व्यस्त तेल व्यापार मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की बाधा आने पर भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर कदम

भारत प्राकृतिक गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए अपने गैस इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहा है।

  • 2014: 15,340 किमी गैस पाइपलाइन
  • 2024: लगभग 25,000 किमी
  • 10,800 किमी नई पाइपलाइन प्रस्तावित
  • 307 भौगोलिक क्षेत्रों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन की अनुमति

दोहरी ऊर्जा परिवर्तन की चुनौती

आंकड़े बताते हैं कि भारत ऊर्जा परिवर्तन के एक डुअल मॉडल से गुजर रहा है।

  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में LPG मुख्य ईंधन बना रहेगा।
  • विकसित और बड़े शहरी क्षेत्रों में PNG का विस्तार धीरे-धीरे बढ़ेगा।

हालांकि आयातित LPG पर निर्भरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती भी बनी हुई है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *