रांची: झारखंड को नशे के अभिशाप से मुक्ति दिलाने और युवाओं को एक बेहतर भविष्य देने की दिशा में राज्य सरकार ने आज एक बड़ा कदम उठाया है। निषिद्ध मादक पदार्थों (Drugs) के सेवन, उसकी अवैध तस्करी और इससे बर्बाद होने वाली जिंदगियों के प्रति लोगों को सचेत करने के लिए सोमवार को एक बड़े राज्यव्यापी जनजागरूकता अभियान का आगाज किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) परिसर से विशेष जागरूकता प्रचार-प्रसार रथों (वाहनों) को हरी झंडी दिखाकर राज्य के विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया।
गांव-गांव घूमकर लोगों को जागरूक करेंगे ये रथ
इस विशेष अभियान के तहत रवाना किए गए हाईटेक प्रचार वाहन झारखंड के कोने-कोने में, खासकर ग्रामीण और आदिवासी बाहुल्य इलाकों में जाकर लोगों को नशे के जानलेवा दुष्प्रभावों की जानकारी देंगे।
इस अभियान का मुख्य फोकस राज्य की युवा पीढ़ी है। वाहनों के माध्यम से युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रहने, खेलकूद से जुड़ने और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि केवल पुलिसिया कार्रवाई से नशा खत्म नहीं हो सकता, इसके लिए जनभागीदारी और जन-जागरूकता का होना बेहद जरूरी है।
नशा सिर्फ इंसान को नहीं, पूरे परिवार को मारता है: मुख्यमंत्री
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह और अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन काफी भावुक और गंभीर नजर आए। उन्होंने कहा:
“नशे की लत किसी भी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक जीवन को पूरी तरह से तबाह कर देती है। मादक पदार्थों की गिरफ्त में आया व्यक्ति न सिर्फ खुद को गंभीर बीमारियों के दलदल में धकेलता है, बल्कि उसका पूरा परिवार और समाज भी इस संकट की आग में झुलस जाता है। इसलिए झारखंड को नशा मुक्त बनाना सिर्फ सरकार का काम नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड के युवाओं को नशे के सौदागरों के चंगुल से बचाना उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार इस काले धंधे पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कड़े कानून और खुफिया नेटवर्क का सहारा ले रही है।
