रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आज एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। मुख्यमंत्री सुरक्षा और प्रोटोकॉल के तामझाम को दरकिनार कर एक आम नागरिक की तरह सीधे प्रोजेक्ट भवन पहुंचे। उनके इस सादगी भरे कदम ने सचिवालय कर्मियों और वहां मौजूद लोगों को चौंका दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि वे खुद को आम जनता का प्रतिनिधि मानते हैं और राज्य की हकीकत को जमीनी स्तर पर समझना उनकी प्राथमिकता है।
शहीद परिवारों के बच्चों के लिए विशेष तोहफा
प्रोजेक्ट भवन में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल की घोषणा की। उन्होंने बताया कि रांची के रिंग रोड स्थित जैगुआर कैंपस में ‘दिशोम गुरु आवासीय विद्यालय’ का निर्माण प्रस्तावित है।
यह विद्यालय विशेष रूप से उन शहीद पुलिसकर्मियों, सैन्य जवानों और सुरक्षा बलों के बच्चों को समर्पित होगा, जिन्होंने देश और राज्य की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन बच्चों को बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
शैक्षिक ढांचे को मिलेगा नया मॉडल
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि इस आवासीय विद्यालय के निर्माण की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इसे केवल एक स्कूल तक सीमित न रखकर एक ऐसे शैक्षिक मॉडल के रूप में विकसित करना है, जो पूरे देश के लिए नजीर बने। इस पहल से न केवल शहीद परिवारों के बच्चों, बल्कि अन्य मेधावी छात्रों को भी आधुनिक और उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त हो सकेगी।
बंगाल चुनाव पर साधी चुप्पी
इस दौरान जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से बंगाल चुनाव के नतीजों को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने बहुत ही संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अभी चुनाव के नतीजों पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। जनता को अपना मताधिकार इस्तेमाल करने देना चाहिए और चुनाव संपन्न होने के बाद स्थितियां खुद-ब-खुद स्पष्ट हो जाएंगी।
