नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध और तनाव का सीधा असर अब देश की राजधानी में दिखने लगा है। देश में पेट्रोल-डीजल की संभावित किल्लत और प्रधानमंत्री की अपील को देखते हुए दिल्ली सरकार ने एक बेहद बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। दिल्ली सरकार अब सरकारी दफ्तरों में सप्ताह में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) लागू करने की तैयारी में है। सरकार का मकसद ईंधन की खपत को कम करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है।
प्राइवेट सेक्टर में भी लागू हो सकता है नियम
दिल्ली सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री की अपील को ध्यान में रखते हुए अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने के लिए एक विशेष प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत दिल्ली के सभी सरकारी दफ्तरों में हर हफ्ते दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ रहेगा। सरकार इस कोशिश में भी जुटी है कि इस नियम को निजी (प्राइवेट) दफ्तरों और कंपनियों में भी स्वैच्छिक या अनिवार्य रूप से लागू कराया जा सके, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और ईंधन की बचत की जा सके।
अफसरों और मंत्रियों के ईंधन कोटे में 20% की कटौती
ईंधन संकट से निपटने के लिए सरकार ने खुद से शुरुआत की है। मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिले में गाड़ियों की संख्या कम की जा रही है। इसके साथ ही अधिकारियों को हर महीने मिलने वाले सरकारी पेट्रोल-डीजल के कोटे में सीधे 20 फीसदी की भारी कटौती कर दी गई है। जिन अधिकारियों को पहले प्रति माह 200 से 250 लीटर ईंधन मिलता था, अब उन्हें इस कटौती का सामना करना होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
मिडिल ईस्ट में जारी जंग की वजह से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसके कारण देश के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की स्थिति बनने लगी है। दिल्ली सरकार का यह कदम भविष्य के किसी बड़े संकट से निपटने के लिए एक अग्रिम सुरक्षा कवच की तरह देखा जा रहा है।
