जामताड़ा में वन विभाग की बड़ी स्ट्राइक: नाकेबंदी कर अर्जुन प्रजाति की 18 कीमती लकड़ियां जब्त, तस्करों में हड़कंप

जामताड़ा: झारखंड में वन संपदा की लूट करने वाले लकड़ी तस्करों के खिलाफ वन विभाग ने जामताड़ा जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की गश्ती टीम ने नाकेबंदी कर अवैध रूप से ले जाई जा रही अर्जुन प्रजाति की 18 कीमती लकड़ियां (बोटे) बरामद की हैं। इसके साथ ही तस्करी में इस्तेमाल हो रहे एक सफेद रंग के टाटा पिकअप वाहन को भी जब्त कर लिया गया है। वन विभाग की इस औचक कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के लकड़ी माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

सुबह-सुबह मिली गुप्त सूचना पर एक्शन

जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 7:30 बजे वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि नाला-मुर्गाबनी रोड के रास्ते बड़े पैमाने पर कीमती लकड़ियों की तस्करी होने वाली है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने फुर्ती दिखाते हुए भेलाडंगाल मोड़ के पास नाकेबंदी कर दी और संदिग्ध वाहनों की चेकिंग शुरू की। इसी दौरान सामने से आ रही एक पिकअप वैन को रोककर जब उसकी तलाशी ली गई, तो पूरी गाड़ी अर्जुन की लकड़ियों से लदी पाई गई।

कागजात मांगने पर छूटे पसीने, 3.25 घनमीटर लकड़ी जब्त

जब वन कर्मियों ने वाहन चालक से लकड़ियों के परिवहन से जुड़े वैध परमिट और चालान की मांग की, तो वह कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इसके बाद स्थानीय गवाहों के सामने जब्ती सूची तैयार की गई। अधिकारियों ने बताया कि जब्त की गई 18 अर्जुन की लकड़ियों का कुल वजन लगभग 3.2571 घनमीटर आंका गया है, जिसकी बाजार में कीमत काफी ज्यादा है। जब्त वाहन और लकड़ियों को सुरक्षा के बीच वन प्रक्षेत्र कार्यालय परिसर लाया गया है।

पूरे तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी

इस सफल छापेमारी अभियान में प्रधान वनरक्षी पुलक कुमार माल, वनरक्षी जाफर मियां और होमगार्ड जवान बापी दास समेत कई वनकर्मियों ने अहम भूमिका निभाई। वन विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि उनका मकसद सिर्फ माल जब्त करना नहीं, बल्कि इस अवैध धंधे के पीछे बैठे मुख्य सरगनाओं और पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करना है। मामले में वन अधिनियम के तहत केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

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