Jharkhand Weather: झारखंड में उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के चलते ठिठुरन लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। राजधानी रांची में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जबकि राज्य के 9 जिलों में पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने 22 दिसंबर तक घने कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया है।
रांची: झारखंड इस समय भीषण ठंड की गिरफ्त में है। उत्तर-पश्चिम से बह रही सर्द हवाओं के कारण पिछले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में 2 डिग्री से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। रांची में कड़ाके की ठंड ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं, जहां पारा गिरकर 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम केंद्र रांची के मुताबिक, राज्य के 9 प्रमुख जिलों में तापमान 10 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया है। बोकारो में सबसे अधिक 2.8 डिग्री की गिरावट देखी गई है। हालांकि, दिन के समय निकलने वाली धूप से कुछ राहत मिल रही है, लेकिन सुबह और रात की ठंड अब भी बेहद परेशान करने वाली बनी हुई है।
इन जिलों में सबसे ज्यादा ठंड
मौसम विभाग के अनुसार, रांची के बाद गुमला और खूंटी में सबसे अधिक ठिठुरन महसूस की गई। इसके अलावा डाल्टनगंज, सिमडेगा, हजारीबाग, लोहरदगा, बोकारो और लातेहार में भी न्यूनतम तापमान 7 से 9 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। राहत की बात यह है कि चाईबासा और सरायकेला जैसे इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान 27 से 28 डिग्री तक पहुंच रहा है, जिससे दोपहर के समय ठंड से थोड़ी राहत मिल रही है।
22 दिसंबर तक कोहरे की चेतावनी
मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, 22 दिसंबर तक झारखंड के अधिकतर हिस्सों में सुबह के समय मध्यम स्तर का कोहरा छाया रह सकता है। दिन चढ़ने के साथ मौसम साफ होगा और धूप निकलने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में कई जिलों के अधिकतम तापमान में भी सामान्य से 1 से 3 डिग्री तक की कमी दर्ज की गई है, जिससे गुमला और कोडरमा जैसे जिलों में दिन के समय भी ठंडक बनी हुई है।
मौसम विभाग की खास सलाह
ठंड और पाले की आशंका को देखते हुए मौसम विशेषज्ञों ने किसानों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। किसानों को सुबह के समय सब्जियों और रबी फसलों में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है। सब्जियों की नर्सरी को ठंड से बचाने के लिए कम लागत वाले पॉलिथीन कवर के इस्तेमाल की भी सिफारिश की गई है। साथ ही, नई फसलों को नमी की कमी से बचाने के लिए बेहतर जल प्रबंधन पर जोर दिया गया है।
