रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) से मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषाओं को बाहर किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पलामू प्रमंडल के सैकड़ों युवाओं के साथ सोमवार को पूर्व मंत्री कमलेश सिंह और भाजपा युवा नेता सूर्या सोनल सिंह ने एक संयुक्त प्रेसवार्ता की। नेताओं ने इस फैसले को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और सीधा अन्याय करार दिया है।
मुख्य बिंदु
- नेताओं की प्रतिक्रिया: पूर्व मंत्री कमलेश सिंह ने मांग की कि सरकार इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करे। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं को नजरअंदाज करना पलामू, गढ़वा और चतरा के युवाओं के साथ भेदभाव है।
- सूर्या सोनल सिंह का बयान: भाजपा नेता सूर्या सोनल सिंह ने कहा कि जब राज्य में अन्य क्षेत्रीय भाषाओं (जैसे उड़िया, बांग्ला और उर्दू) को प्राथमिकता दी जा रही है, तो पलामू प्रमंडल की प्रमुख भाषाओं को बाहर करना नीतिगत भेदभाव है। उन्होंने मुख्यमंत्री के कथित बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें इन भाषाओं को बोलने वालों को लेकर टिप्पणी की गई थी।
- आंदोलन की चेतावनी: नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि इस फैसले को वापस नहीं लिया गया, तो पलामू प्रमंडल में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
📊 स्थिति एक नज़र में
| विषय | विवरण |
| संबंधित परीक्षा | झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) |
| विवादित मुद्दा | परीक्षा से मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषाओं को हटाया जाना |
| प्रमुख मांग | फैसले पर पुनर्विचार और क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करना |
| प्रभावित क्षेत्र | पलामू प्रमंडल (पलामू, गढ़वा, चतरा) |
