महुआडांड़ (लातेहार): प्रखंड के परहा टोली जाने वाले मार्ग पर रामपुर नदी पर बने पुल का एप्रोच पथ पिछले 7 वर्षों से बदहाली का शिकार है। इस वजह से प्रखंड मुख्यालय से जुड़े एक दर्जन से अधिक गाँवों के हजारों ग्रामीणों का संपर्क मुख्य सड़क से कट जाता है। आलम यह है कि हर साल बरसात आते ही नदी की तेज धार इस रास्ते को बहा ले जाती है, जिससे स्कूली बच्चों और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
7 साल पहले बना पुल, पहली ही बारिश में ढह गया एप्रोच पथ
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 7 साल पहले इस पुल का निर्माण पूरा हुआ था। लेकिन पहली ही बरसात में पुल को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला एप्रोच पथ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद प्रशासन की बेरुखी को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद हिम्मत जुटाई। लोगों ने सामूहिक सहयोग और श्रमदान के जरिए अब तक 3 बार इस रास्ते को चलने लायक बनाया, लेकिन हर साल मानसून आते ही नदी का जलस्तर बढ़ने से यह अस्थायी रास्ता फिर से बह जाता है।
कम लंबाई और संकरा पुल है मुख्य समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि:
“नदी का पाट (चौड़ाई) अधिक है और उस मुकाबले पुल की लंबाई काफी कम रखी गई है। यही वजह है कि बरसात में जब पानी का फैलाव बढ़ता है, तो पानी का दबाव एप्रोच पथ पर आ जाता है और वह टिक नहीं पाता।”
स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
यह पुल प्रखंड मुख्यालय से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रोज़ाना बड़ी संख्या में बच्चे विभिन्न गाँवों से इसी रास्ते से होकर पढ़ाई करने आते हैं। पानी कम होने पर बच्चे जैसे-तैसे पुल पार कर लेते हैं, लेकिन एप्रोच पथ न होने से नीचे उतरने में काफी परेशानी होती है। सबसे बुरा हाल मरीजों और प्रसव पीड़ित महिलाओं का होता है, जिन्हें समय पर अस्पताल पहुँचाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। बाढ़ जैसी स्थिति में तो आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है।
स्थायी समाधान की मांग
परेशान ग्रामीणों ने लातेहार जिला प्रशासन से इस समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों की मांग है कि सिर्फ खानापूर्ति करने के बजाय पुल की लंबाई बढ़ाई जाए और एप्रोच पथ का पक्का (स्थायी) निर्माण कराया जाए, ताकि हजारों लोगों को इस सालाना मुसीबत से हमेशा के लिए निजात मिल सके।
