रांची: झारखंड की राजधानी रांची के नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 (RIMS-2) के निर्माण पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने अगली सुनवाई तक पूरी तरह से रोक लगा दी है। आयोग ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि उपजाऊ कृषि भूमि उजाड़ने के बजाय किसी बंजर या परती जमीन पर अस्पताल का निर्माण कराया जाए।
यह आदेश सोमवार को रांची के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित एक जनसुनवाई के दौरान आया, जिसकी अध्यक्षता NCST की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने की।
### उपजाऊ जमीन पर अस्पताल क्यों? आयोग ने उठाए सवाल
जनसुनवाई के दौरान कांके प्रखंड के नगड़ी में 222 एकड़ भूमि पर बनने वाले रिम्स-2 का मामला प्रमुखता से उठा। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने कड़ा रुख अपनाया और अगली सुनवाई तक जमीन पर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर पूर्ण विराम लगा दिया।
“जिस भूमि पर राज्य सरकार रिम्स-2 बनाने की योजना बना रही है, वह बेहद उपजाऊ है और स्थानीय रैयतों (किसानों) की आजीविका का एकमात्र साधन है। सरकार को अस्पताल के लिए बंजर जमीन तलाशनी चाहिए।” – डॉ. आशा लकड़ा, सदस्य (NCST)
### अधिकारियों को फटकार, 1 महीने में मांगी मुआवजे की रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान जब जमीन अधिग्रहण और प्रभावित किसानों से जुड़ा मामला सामने आया, तो संबंधित अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि अब तक कितने रैयतों को मुआवजे का भुगतान किया जा चुका है।
अधिकारियों की इस ढुलमुल कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए NCST ने सख्त निर्देश दिए:
- विभागीय अधिकारियों को एक महीने के भीतर मुआवजे के भुगतान की विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपनी होगी।
- जब तक मामला आयोग में लंबित है, तब तक प्रभावित क्षेत्र में एक ईंट भी नहीं रखी जाएगी।
