रांची: झारखंड के होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में महिला कैदी के कथित यौन शोषण और उसके गर्भवती होने के मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। इस गंभीर मामले के तूल पकड़ने के बाद अब खुद पीड़ित महिला कैदी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। महिला ने रांची के उपायुक्त (DC) मंजू नाथ भजन्त्री को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि जेल में उसके साथ कोई गलत हरकत नहीं हुई है, इसलिए इस मामले की जांच को तुरंत बंद किया जाए।
“आरोपों से मेरी छवि खराब हो रही है, मुझे दूर रखें”
महिला कैदी ने अपने पत्र में लिखा है कि उसके साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार या यौन शोषण नहीं किया गया है। वह इस मामले में न तो कोई जांच चाहती है और न ही किसी जांच टीम को अपना बयान दर्ज कराना चाहती है। कैदी का कहना है कि सोशल मीडिया और मीडिया में चल रही सभी खबरें महज अफवाह हैं, जिससे समाज में उसकी छवि को भारी नुकसान पहुंच रहा है। उसने गुहार लगाई है कि उसे इस पूरे विवाद से दूर रखा जाए और अनावश्यक रूप से तंग न किया जाए।
डीसी ने की पत्र की पुष्टि, जांच अभी भी जारी
रांची के उपायुक्त मंजू नाथ भजन्त्री ने महिला कैदी द्वारा भेजे गए इस पत्र की पुष्टि की है। उन्होंने बताया:
“महिला बंदी ने पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उसके साथ कुछ गलत नहीं हुआ है, इसलिए उसे परेशान न किया जाए। हालांकि, प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से बारीकी से तफ्तीश कर रही है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।”
हाईकोर्ट की फटकार के बाद गर्माया था मामला
गौरतलब है कि बीते 22 मई को झारखंड हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस कथित यौन शोषण मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया था। अदालत ने राज्य सरकार और जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। साथ ही राज्य के डीजीपी (DGP) को खुद हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया था कि इन संगीन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए पुलिस ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
8 जून की सुनवाई पर टिकी नजरें
इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 8 जून को होनी है, जिसमें सरकार और पुलिस को जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य अदालत के सामने पेश करने हैं। लेकिन कोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले पीड़िता के इस यू-टर्न (बयान पलटने) ने पूरे मामले को एक नया एंगल दे दिया है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट महिला के इस पत्र पर क्या रुख अपनाता है।
