पटना: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर सियासी पारा गरमा गया है। बिहार के नेता प्रतिपक्ष और राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह छापेमारी पूरी तरह से राजनीतिक दुर्भावना और बदले की भावना से प्रेरित है।
“क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करने के लिए हो रहा एजेंसियों का दुरुपयोग”
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का खुलेआम दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाने और देश से क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का अस्तित्व समाप्त करने के उद्देश्य से इस तरह की दमनकारी कार्रवाइयां की जा रही हैं।
तेजस्वी यादव ने मोदी सरकार से पूछे तीखे सवाल
केंद्र सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कुछ गंभीर सवाल खड़े किए:
- 12 वर्षों का हिसाब दे सरकार: मोदी सरकार यह बताए कि पिछले 12 सालों में जांच एजेंसियों (ED, CBI) द्वारा विपक्षी नेताओं पर मनगढ़ंत और फर्जी केस दर्ज करने, रेड मारने और पूछताछ के बाद कितने नेताओं को क्लीन चिट देकर बीजेपी में शामिल कराया गया है?
- भ्रष्टाचार के आरोपियों को इनाम: विपक्ष के जिन नेताओं पर कार्रवाई की गई, उनमें से कितनों को बीजेपी में शामिल कराकर ‘ईमानदारी का सर्टिफिकेट’ दिया गया और उन्हें बड़े पदों से पुरस्कृत किया गया?
“वीडियो में नोट लेते दिखने वाले बन रहे मुख्यमंत्री” तेजस्वी यादव ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग सरेआम वीडियो में पैसे (नोट) लेते पकड़े गए और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपी हैं, उन्हें तो यह सरकार मुख्यमंत्री के पद से नवाज रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता के बल पर चाहे जितना दमन कर लिया जाए, लेकिन तानाशाही के इस दौर में अंततः जीत सच्चाई और न्याय की ही होगी।
